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सरहद और घर के बीच मिट गई दूरियां: अब फौजी मिनटों में परिवार के सुख-दुख में शामिल

देश की हिफाजत में तैनात जवानों के लिए अब सरहद और घर की दूरियां जैसे मिट गई हैं। वे चाहे सैकड़ों किलोमीटर दूर हों, लेकिन चंद मिनटों में ही परिवार के सुख-दुख की हर घड़ी में वर्चुअल तरीके से शामिल हो रहे हैं। पहले जहां सैनिकों को छह-छह महीने तक छुट्टी नहीं मिलती थी और वे केवल पत्र या लैंडलाइन फोन के जरिए ही घर से संपर्क कर पाते थे, वहीं अब इंटरनेट तकनीक के कारण वे रोजाना अपने परिवार से वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ सकते हैं। इससे न केवल सैनिकों की घर की चिंता कम हुई है, बल्कि उनके परिजन भी उनसे बात कर अच्छा महसूस कर रहे हैं।

पहले महीने में दो-चार पत्र ही भेज सकते थे…

भारतीय सेना से रिटायर्ड सूबेदार भंवरसिंह शेखावत ने अपने सेना के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय उन्हें हर महीने महज दो से चार पत्र ही मिलते थे, और कभी-कभी तो एक-दो पत्र ही मिल पाते थे। घर से पत्र आने में भी एक महीने तक का समय लग जाता था। लेकिन अब समय बदल गया है, अब चाहे कितनी भी दूरी हो, वह छोटी ही लगती है।

युवाओं में बढ़ा सेना में जाने का क्रेज…

तकनीकी सुविधाओं के विस्तार के कारण युवाओं में सेना में शामिल होने का क्रेज भी बढ़ा है। एक दशक पहले जहां सेना में भर्ती के लिए एकेडमी बहुत कम होती थी, वहीं अब राजस्थान में 700 से ज्यादा डिफेंस एकेडमी हैं। अकेले जयपुर में 20 से 25 एकेडमी हैं, जिनमें हर एकेडमी में 100 से 250 तक युवा ट्रेनिंग कर रहे हैं।

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