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अलवर।
सरिस्का टाइगर रिजर्व के CTH (क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) के नए ड्राफ्ट को लेकर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंच से गाने के जरिए अपने पक्ष को रखा, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पलटवार करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए।
🐅 जूली ने पूछा – क्या बाघों को फायदा होगा या बंद खनन फिर शुरू होंगे?
टीकाराम जूली ने कहा कि मंत्री सिर्फ इतना साबित कर दें कि नए CTH ड्राफ्ट से एक भी बंद खान नहीं खुलेगी और सिर्फ बाघों को ही फायदा होगा। अगर ऐसा है तो मंत्री स्थिति स्पष्ट करें।
⚠️ वन्यजीवों को खतरा, जनता को धोखा
जूली ने आरोप लगाया कि मंत्री का झुकाव खनन माफिया और होटल कारोबारियों की ओर है। अगर ये खानें दोबारा चालू होती हैं, तो वन्यजीवों को गंभीर खतरा होगा और अलवर की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करेगी।
🌳 बाघिन और उसके शावकों का इलाका बाहर
उन्होंने बताया कि सरिस्का के टहला क्षेत्र में 3.7 वर्ग किलोमीटर का सघन जंगल है, जहां बाघिन ST-27 ने मई 2024 में दो शावकों को जन्म दिया था। इस क्षेत्र को CTH से हटा कर बफर जोन में डालने की योजना है, जो गलत है।
🏗️ इकोलॉजिकल नहीं, इकोनॉमिक ज़ोन की चिंता
जूली ने कहा कि वन मंत्री को पर्यावरणीय संवेदनशीलता (Ecological Sensitive Zone) की बजाय आर्थिक फायदे (Economic Sensitive Zone) की ज्यादा चिंता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंद की गई 50 से ज्यादा खानों को दोबारा शुरू करवाना चाहते हैं।
टीकाराम जूली का कहना है कि अगर सरकार बाघों के संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो CTH ड्राफ्ट में पारदर्शिता दिखाए और यह साबित करे कि कोई खनन नहीं होगा, सिर्फ वन्यजीव संरक्षण होगा।
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