Breaking News
cyprus-india

साइप्रस पहुंचेंगे पीएम मोदी, तुर्किए को कूटनीतिक जवाब देने की तैयारी?

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले दिनों में यूरोप दौरे पर रवाना होंगे, लेकिन इस बार एक अहम पड़ाव उनके दौरे को खास बना रहा है—साइप्रस। यह वही देश है जिससे तुर्किए का दशकों पुराना टकराव रहा है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी का यह कदम न केवल भारत की रणनीतिक गहराई को दर्शाता है, बल्कि तुर्किए और पाकिस्तान के हालिया गठजोड़ को भी करारा जवाब है।

तुर्किए-साइप्रस विवाद की पृष्ठभूमि

1974 में तुर्किए ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद यह द्वीप दो हिस्सों में बंट गया। एक ओर ग्रीक-साइप्रस शासित गणराज्य है, जिसे वैश्विक मान्यता प्राप्त है, वहीं दूसरी ओर तुर्क-साइप्रस क्षेत्र है, जिसे केवल तुर्किए मान्यता देता है। इस सैन्य अतिक्रमण के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव जारी है।

भारत-तुर्किए तनाव और पाकिस्तान से नजदीकी

हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान तुर्किए की ओर से पाकिस्तान को ड्रोन और हथियारों की आपूर्ति की गई। कराची में टर्किश युद्धपोत और वायुसेना के विमान देखे गए। भारत ने इसे गंभीरता से लिया है और अब कूटनीतिक रूप से जवाब देने की रणनीति पर काम कर रहा है।

पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा—संकेतों से परे

प्रधानमंत्री मोदी 15-17 जून के बीच कनाडा के G-7 सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। लेकिन उससे पहले वह साइप्रस पहुंचेंगे और वापसी में क्रोएशिया के रास्ते भारत लौटेंगे। जानकारों का मानना है कि यह यात्रा प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि स्पष्ट संदेश है—भारत अपने विरोधियों को कूटनीतिक मोर्चे पर भी जवाब देना जानता है।

साइप्रस को मिल सकती है EU की अध्यक्षता

यह यात्रा इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि अगले वर्ष साइप्रस को यूरोपीय संघ की छह महीने की अध्यक्षता मिल सकती है। ऐसे में भारत का साइप्रस के साथ संबंध मजबूत करना रणनीतिक दृष्टिकोण से फायदेमंद साबित हो सकता है।

भारत की पुरानी नज़दीकियां

पीएम मोदी से पहले केवल दो भारतीय प्रधानमंत्रियों ने साइप्रस का दौरा किया है—1983 में इंदिरा गांधी और 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी। पीएम मोदी इस सूची में तीसरे नाम के रूप में जुड़ने वाले हैं।

तुर्किए के लिए कूटनीतिक चुनौती

तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन पाकिस्तान के प्रति खुले समर्थन के लिए जाने जाते हैं। हालांकि भारत ने 2023 में आए विनाशकारी भूकंप के समय तुर्किए की मानवता के नाते मदद की थी, लेकिन इसके बावजूद तुर्किए का पाकिस्तान के साथ खड़ा होना द्विपक्षीय संबंधों में दरार का कारण बना।


निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा सिर्फ एक द्विपक्षीय भेंट नहीं है, यह भारत की विदेश नीति के उस रुख को दिखाती है जिसमें रणनीतिक साझेदारियों और विरोधियों की नीतियों का संतुलित जवाब शामिल है। आने वाले समय में इस दौरे के नतीजे तुर्किए-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर एक अहम मोड़ ला सकते हैं।

About Chandni Khan

Check Also

पटना हाई कोर्ट का बड़ा कदम: विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार सहित 42 विधायकों को नोटिस

पटना हाई कोर्ट ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को नोटिस जारी …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?