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जयपुर के मानसरोवर इलाके की चौड़ी सड़कें अब अतिक्रमण और जाम की वजह से छोटी होती जा रही हैं। पहले यहां 70 से 100 फीट चौड़ी सड़कें हुआ करती थीं, लेकिन अब कई जगह सड़क की चौड़ाई 40 से 50 फीट तक सिमट गई है।
कागजों में सड़कें भले 100 फीट दर्ज हों, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग नजर आती है। सड़क किनारे अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
15 किलोमीटर में नहीं मिली सुगम राह
इलाके की मुख्य सड़कों का निरीक्षण करने पर सामने आया कि कई जगह दुकानों और प्रतिष्ठानों ने सड़क तक निर्माण कर लिया है। रैम्प और सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों ने रास्ता और संकरा कर दिया है।
विजय पथ, पटेल मार्ग, वरुण पथ और शिप्रा पथ जैसे प्रमुख मार्गों पर भी यही हाल है। पीक समय में दोनों ओर खड़ी गाड़ियों के कारण वाहन धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं और लंबा जाम लग जाता है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अधूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है, लेकिन यह स्थायी नहीं होती। कुछ दिनों बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। कई जगह अस्थायी और पक्के निर्माण खड़े हो चुके हैं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही।
ट्रांसफॉर्मर और गड्ढों से बढ़ा खतरा
कई चौराहों के मोड़ों पर ट्रांसफॉर्मर लगे होने से दृश्यता कम हो जाती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ता है।
इसके अलावा, अलग-अलग विभागों द्वारा बार-बार सड़क खोदने के बाद मरम्मत अधूरी छोड़ दी जाती है। बरसात में ये गड्ढे और ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं।
पार्किंग की बड़ी समस्या
बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। लोग गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं, जिससे रास्ता और संकरा हो जाता है। इससे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों को भी दिक्कत होती है।
प्रशासन के निर्देश
प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि सड़क सीमा में हो रहे अतिक्रमण हटाए जाएं। पहले भी कुछ मार्गों से अतिक्रमण हटाया गया है और आगे भी कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है।
कुल मिलाकर, मानसरोवर में सड़क, पार्किंग और अतिक्रमण की समस्या के समाधान के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने की जरूरत है।
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