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उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 2025-26 मंगलवार से शुरू हो गया। सत्र के पहले ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के बीच तीखी बहस हुई। ये बहस भाषा को लेकर हुई, जो काफी देर तक चली। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी इस मामले में अपनी राय दी।
क्या था बहस का कारण?
सरकार ने विधानसभा की कार्यवाही को हिंदी के साथ-साथ अवधी, ब्रज, भोजपुरी, बुंदेली और अंग्रेजी में शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इस पर बहस शुरू हुई, जिसमें माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि उर्दू को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए और अंग्रेजी को हटाना चाहिए।
सीएम योगी का जवाब
नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विभिन्न बोलियों, जैसे भोजपुरी, अवधी, ब्रज और बुंदेलखण्डी को इस सदन में सम्मान मिल रहा है। सरकार इन बोलियों के लिए अलग-अलग अकादमियां बनाने की प्रक्रिया में है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सदन केवल शुद्ध साहित्यिक विद्वानों के लिए नहीं है। अगर कोई हिंदी में धाराप्रवाह नहीं बोल सकता, तो उसे अपनी बात भोजपुरी, अवधी, ब्रज या बुंदेलखण्डी में कहने का अधिकार मिलना चाहिए।
सीएम योगी का समाजवादियों पर हमला
सीएम योगी ने आगे कहा कि समाजवादियों का दोहरा चरित्र बहुत अजीब है। वे खुद अपने बच्चों को पब्लिक स्कूल में पढ़ाते हैं और दूसरों के बच्चों को गांव के स्कूलों में भेजने की सलाह देते हैं, जहां संसाधन कम हैं। यह उनका दोहरा मापदंड है।
कठमुल्लापन की ओर जाने की साजिश?
सीएम योगी ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी हर अच्छे काम का विरोध करती है जो राज्य के हित में होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी उर्दू को बढ़ावा देकर देश को कठमुल्लापन की ओर ले जाना चाहती है।
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