नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारत के सफल “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पाकिस्तान के भीतर घबराहट का माहौल बन गया है। वहीं, भारत की कड़ी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सराहना के बीच पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं को सीजफायर टूटने का डर सता रहा है। खासकर, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने आशंका जताई है कि हालात बिगड़े तो इसका असर केवल दक्षिण एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर की वैश्विक सराहना और पाकिस्तान की बेचैनी
भारतीय सेना द्वारा हाल ही में चलाया गया “ऑपरेशन सिंदूर” रणनीतिक रूप से बेहद सफल रहा। इस मिशन में पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकाने—जैसे एयरबेस और रडार—को टारगेट करके निष्क्रिय किया गया। इसके चलते पाकिस्तान राजनयिक दबाव में आ गया और उसने सीजफायर की बहाली का प्रस्ताव भारत को दिया।
बिलावल भुट्टो की बदली हुई भाषा: अब अमन की वकालत
वहीं, वही बिलावल भुट्टो जो पहले भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देते थे, अब शांति की बात कर रहे हैं। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा,
“वर्तमान सीजफायर एक बड़ी उपलब्धि है। पाकिस्तान शांति का पक्षधर है, लेकिन भारत की आंतरिक राजनीति से जो बयान सामने आ रहे हैं, उनसे लगता है कि यह सीजफायर कभी भी टूट सकता है, और यह सभी के लिए घातक होगा।”
बिलावल ने इस स्थिति को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के लिए “कूटनीतिक परीक्षा” बताया और उम्मीद जताई कि तीनों नेता इसे संभाल पाएंगे।
शहबाज शरीफ ने फिर दोहराई भारत से बातचीत की मंशा
इसी बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी भारत से वार्ता की इच्छा जताई है। पंजाब प्रांत के एक दौरे के दौरान उन्होंने मीडिया से कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है और बातचीत के लिए तैयार है। उनके साथ डिप्टी पीएम इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भी मौजूद थे।
हालांकि, शरीफ ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को बातचीत की शर्त के तौर पर शामिल करने की बात कही, जिस पर भारत ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और इस पर कोई चर्चा नहीं की जा सकती।
निष्कर्ष: तनाव के बीच उम्मीद की हल्की किरण
भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई और पाकिस्तान के बदले सुरों के बीच दक्षिण एशिया में शांति की संभावनाएं अभी धुंधली हैं, लेकिन कूटनीतिक संवाद की खिड़की खुली है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान अपने बयानों पर अमल करेगा या फिर यह सिर्फ राजनयिक दिखावा है।
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