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छत्तीसगढ़ के कोयलीबेड़ा ब्लॉक में पोषण आहार योजना में गंभीर लापरवाही सामने आई है। सुपरवाइजर की ढीली मानिटरिंग और जय लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की अनदेखी के कारण छोटे बच्चों और गर्भवती माताओं को सही पोषण आहार नहीं मिल रहा। इस लापरवाही से कई बच्चे कुपोषण और बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली
सरकार की पोषण आहार योजना का उद्देश्य गर्भवती माताओं और छोटे बच्चों को जरूरी पोषण उपलब्ध कराना है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास सही हो सके। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म भोजन और पोषक सामग्री दी जाती है। लेकिन कंदाड़ी और खैरीपदार जैसे दूरदराज के आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बेहद खराब है। निरीक्षण में पाया गया कि बच्चों और गर्भवती माताओं को केवल नाम मात्र का भोजन मिल रहा है। सहायिकाओं ने बताया कि खाद्यान्न की कमी के कारण जैसा संभव हो, वैसा भोजन बनाया जाता है।
बच्चों के पोषण पर असर
जय लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह को 30 केंद्रों पर खाद्यान्न पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे हर महीने की 4 से 5 तारीख तक केंद्रों पर पहुंच जाना चाहिए। लेकिन समूह और अधिकारियों की मिलीभगत से खाद्यान्न केवल कागजों में वितरित हो रहा है। इस कारण बच्चों के पोषण पर बुरा असर पड़ा है।
प्रशासन की लापरवाही
अगर सुपरवाइजर अपनी ड्यूटी सही तरीके से निभाते, तो बच्चे पोषण आहार से वंचित नहीं होते। इस लापरवाही का सीधा असर बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
जांच का आश्वासन
इस संबंध में परियोजना अधिकारी प्रभारी सीमा सिंह ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है। उन्होंने सुपरवाइजर से पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।
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