दमिश्क: सीरिया की अस्थायी इस्लामी सरकार ने सार्वजनिक समुद्र तटों और स्विमिंग पूल्स पर महिलाओं के पहनावे को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नई गाइडलाइन के तहत महिलाएं अब केवल बुर्किनी या फुल-बॉडी स्विमवियर ही पहन सकेंगी। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक स्थानों पर टाइट या पारदर्शी कपड़े पहनने पर भी रोक लगा दी गई है।
इस निर्णय को शरिया आधारित शासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो कि सीरिया में बशर अल-असद की सत्ता के बाद के बदलाव का प्रतीक है। यह स्पष्ट संदेश भी दिया गया है कि सीरिया किसी भी ऐसी संस्कृति को स्वीकार नहीं करेगा जिसे वह “इस्लाम विरोधी” मानता है — चाहे वह तुर्किए जैसे आधुनिक इस्लामी राष्ट्रों में आम हो।
क्या कहती है नई ड्रेस कोड नीति?
सीरिया के पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
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महिलाएं सार्वजनिक पूल और समुद्र तटों पर केवल बुर्किनी या फुल-बॉडी स्विमवियर पहन सकती हैं।
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बीच या पूल क्षेत्र में आने-जाने के दौरान उन्हें ढीला चोगा या कफ्तान पहनना अनिवार्य होगा।
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पुरुषों को पूल क्षेत्र के बाहर शर्ट पहननी होगी।
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सार्वजनिक स्थानों पर टाइट, पारदर्शी या घुटनों से ऊपर के कपड़े पहनने पर रोक है।
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हालांकि, चार सितारा या उससे ऊपर के होटलों और निजी समुद्र तटों पर वेस्टर्न स्टाइल ड्रेसिंग की अनुमति है।
इस्लामी शासन का प्रभाव और तुर्किए से टकराव
इस ड्रेस कोड के पीछे जो अंतरिम सरकार है, उसका नेतृत्व कर रहा है हयात तहरीर अल-शाम (HTS) — जो कभी अल-नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था और जिसे अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
HTS द्वारा संचालित सरकार अब शरिया आधारित संविधान की ओर कदम बढ़ा रही है। दिलचस्प बात यह है कि जिस नेता — अहमद अल-शराआ — को तुर्किए के सहयोग से सत्ता में लाया गया था, वही अब तुर्की के उदार और आधुनिक ड्रेस कोड मॉडल को खारिज कर रहा है।
पर्यटन मंत्री माज़ेन अल-सलहानी के अनुसार, “यह नियम समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के सम्मान में बनाया गया है।”
तुर्किए का मॉडरेट रुख और सीरिया की दूरी
दूसरी ओर, तुर्किए आज भी एक आधुनिक इस्लामी लोकतंत्र की पहचान रखता है। इस्तांबुल, अंकारा और अन्य बड़े शहरों में महिलाएं वेस्टर्न पहनावे में पूरी आज़ादी से घूमती हैं। अंटाल्या और बोडरम जैसे समुद्री शहरों में बिकिनी से लेकर बुर्किनी तक कोई रोक-टोक नहीं है।
मगर सीरिया अब उस राह से अलग चल रहा है। HTS सरकार तुर्किए की तरह “मॉडरेट इस्लाम” को अपनाने की बजाय सख्त धार्मिक नियमों की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह एक विडंबना है कि जिस नेता को तुर्किए ने समर्थन देकर सत्ता में लाया, अब वही देश तुर्किए की आधुनिकता को “इस्लाम विरोधी” ठहरा रहा है।
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