POCSO के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, कहा- किशोरों के रिश्तों को सिर्फ अपराध की नजर से नहीं देखा जा सकता
channel_009 | Supreme Court News
सुप्रीम कोर्ट ने POCSO कानून के संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किशोर उम्र में लड़का-लड़की के बीच आकर्षण और साथ भागने जैसी घटनाओं को समझने के लिए सिर्फ सख्त आपराधिक नजरिया पर्याप्त नहीं हो सकता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि “लड़का-लड़की को भागने से सरकार आखिर कैसे रोकेगी?” अदालत ने यह भी कहा कि किशोरावस्था नई चीजें समझने, अनुभव करने और भावनात्मक बदलावों से गुजरने की उम्र होती है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी उन मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां आपसी सहमति से बने किशोर संबंधों में भी लड़के के खिलाफ POCSO के तहत मामला दर्ज हो जाता है। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों, उम्र, रिश्ते की प्रकृति और दोनों पक्षों की वास्तविक स्थिति को ध्यान से देखना जरूरी है।
हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं कहा कि नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को कमजोर किया जाए। चिंता इस बात पर जताई गई कि बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बने कानून का इस्तेमाल कहीं पारिवारिक नाराजगी, सामाजिक दबाव या आपसी रिश्तों को आपराधिक रंग देने के लिए तो नहीं हो रहा।
अब इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर बहस तेज हो गई है कि किशोरों की सुरक्षा और उनके भावनात्मक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशील जांच और न्यायिक विवेक बेहद जरूरी है।
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