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सॉन ‘डिडी’ कॉम्ब्स पर सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप: जूरी आज से करेगी विचार-विमर्श

न्यूयॉर्क:
सुप्रसिद्ध म्यूज़िक प्रोड्यूसर और एंटरप्रेन्योर सॉन ‘डिडी’ कॉम्ब्स के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित यौन तस्करी और रैकेटियरिंग केस में अब जूरी सोमवार से अंतिम फैसला लेने के लिए विचार-विमर्श शुरू करेगी।

कॉम्ब्स पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सेलिब्रिटी, दौलत और कारोबारी साम्राज्य का इस्तेमाल कर एक संगठित आपराधिक गिरोह चलाया, जिसमें महिलाओं को ड्रग्स के प्रभाव में escorts के साथ यौन गतिविधियों के लिए मजबूर किया गया।


क्या है मामला?

55 वर्षीय कॉम्ब्स के खिलाफ 5 संघीय आरोप हैं, जिनमें रैकेटियरिंग, सेक्स ट्रैफिकिंग और वेश्यावृत्ति के लिए महिलाओं की ट्रांसपोर्टेशन शामिल है।
यदि दोषी पाए गए, तो उन्हें आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है।

मुकदमे के सात सप्ताह में 34 गवाहों की गवाही, हजारों फोन रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों को अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने बताया कि कॉम्ब्स ने भावनात्मक और यौन शोषण के जरिए महिलाओं को अपने नियंत्रण में रखा।


बचाव पक्ष की दलीलें

कॉम्ब्स के वकील मार्क एग्निफिलो ने शुक्रवार को अंतिम बहस में कहा कि उनके मुवक्किल के रिश्ते “जटिल” जरूर थे, लेकिन सहमति आधारित थे। उन्होंने आरोप लगाने वाली महिलाओं—कासांद्रा वेंटुरा और एक अन्य महिला जिसने “जेन” नाम से गवाही दी—की नीयत पर सवाल उठाया और आरोपों को पैसे की लालच बताया।

बचाव पक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि कॉम्ब्स ने कभी-कभी अपनी पार्टनर्स को पीटा था, लेकिन कहा कि यह घरेलू हिंसा थी, न कि सेक्स ट्रैफिकिंग या संगठित अपराध।


अभियोजन पक्ष की जवाबी कार्रवाई

सरकारी वकील मॉरीन कोमी ने कहा,

“कॉम्ब्स कानून की हर सीमा को लांघ चुके थे, और उन्हें लगता था कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाओं को भावनात्मक रूप से तोड़कर यौन गतिविधियों के लिए मजबूर किया गया।

“इन महिलाओं को लगता था कि उनके पास कोई विकल्प नहीं था।”

सरकारी वकील ने जूरी को बताया कि कॉम्ब्स का स्टाफ सिर्फ उनकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए रखा गया था, और इसमें जबरन मज़दूरी, गवाही को प्रभावित करना, अपहरण और रिश्वत जैसे अपराध शामिल थे।


अब क्या होगा?

  • जज अरुण सुब्रमण्यम सोमवार को जूरी को कानून की व्याख्या करेंगे और बताएंगे कि उपलब्ध सबूतों को कैसे देखा जाए।

  • 8 पुरुष और 4 महिलाएं वाली जूरी को हर आरोप पर सर्वसम्मति से निर्णय देना होगा।

  • जूरी को यह तय करना होगा कि क्या कॉम्ब्स ने अपने संगठन के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर कम से कम दो अपराधों में साजिश रची थी, जो रैकेटियरिंग की परिभाषा में आते हैं।

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