ब्लैटन, स्विट्जरलैंड: स्विट्जरलैंड की आल्प्स पर्वत श्रृंखला में स्थित खूबसूरत गांव ब्लैटन एक भयावह प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गया है। 28 मई को अचानक एक विशाल ग्लेशियर का हिस्सा ढह गया, जिससे बर्फ, कीचड़ और चट्टानों की एक विनाशकारी लहर ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे का ड्रोन फुटेज भी सामने आया है, जिसमें तबाही का मंजर रौंगटे खड़े कर देने वाला है।
कैसे मची तबाही?
वैलैस कैंटन क्षेत्र में बसे ब्लैटन गांव में ग्लेशियर टूटने के बाद भूस्खलन हुआ, जिसने निचले इलाके में बसे घरों और रास्तों को पूरी तरह से ढक दिया। रिपोर्टों के अनुसार, बर्फ और पत्थरों का प्रवाह इतना तेज था कि जो भी उसकी राह में आया, बह गया।
राहत की खबर: 300 लोगों को समय रहते निकाला गया सुरक्षित
गनीमत रही कि वैज्ञानिकों ने 19 मई को ही संभावित खतरे की आशंका जताई थी, जब उन्होंने पहाड़ पर गंभीर दरारें देखीं। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने गांव को खाली कराने का आदेश दे दिया। इसी कारण से लगभग 300 लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था, जिससे जनहानि टल गई।
“हमने अपना गांव खो दिया” – मेयर का भावुक बयान
ब्लैटन के मेयर मैथियास बेलवाल्ड ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह हमारा घर था। हमने इसे खो दिया, यह अब मलबे के नीचे दबा है। लेकिन हम इसे फिर से खड़ा करेंगे।” उनका यह बयान न सिर्फ स्थानीय लोगों की हिम्मत को दर्शाता है, बल्कि पुनर्निर्माण की उम्मीद भी जगाता है।
राष्ट्रपति का संदेश और एहतियाती कदम
स्विस राष्ट्रपति कारिन केलर-सटर ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि “घर खोना बेहद दर्दनाक अनुभव है। हम इस मुश्किल घड़ी में प्रभावित लोगों के साथ हैं।” प्रशासन ने घाटी की मुख्य सड़कों को बंद कर दिया है और आम नागरिकों से क्षेत्र में न जाने की अपील की है।
क्या कह रहे हैं वैज्ञानिक? यह चेतावनी है पूरी दुनिया के लिए
पर्यावरण वैज्ञानिक क्रिश्चियन ह्यूगेल के अनुसार, यह आपदा परमा-फ्रॉस्ट (स्थायी रूप से जमी बर्फ) के पिघलने की वजह से हुई, जिसने पहाड़ की स्थिरता को कमजोर कर दिया। यह घटना एक गंभीर जलवायु चेतावनी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले 100 वर्षों में आल्प्स में ऐसी तबाही पहले नहीं देखी गई।
अब जरूरी है निर्णायक जलवायु कार्रवाई
स्विट्जरलैंड की इस त्रासदी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन कोई दूर की आशंका नहीं, बल्कि एक वर्तमान संकट है। यदि अब भी वैश्विक स्तर पर निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी आपदाएं और अधिक व्यापक और विनाशकारी होती जाएंगी।
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