वॉशिंगटन, 24 जून 2025 — अमेरिका की एक संघीय अदालत ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और ट्रंप प्रशासन के बीच चल रहे लंबे विवाद में एक बार फिर विदेशी छात्रों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने ट्रंप सरकार द्वारा विदेशी छात्रों के प्रवेश पर लगाई गई रोक को दूसरी बार अस्थायी रूप से खारिज कर दिया है।
⚖️ कोर्ट का बड़ा फैसला, छात्रों को मिली राहत
बोस्टन की अमेरिकी जिला न्यायाधीश एलिसन बरो ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक इस मामले की पूरी सुनवाई और निर्णय नहीं हो जाता, तब तक विदेशी छात्रों को हार्वर्ड में पढ़ाई के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी जाएगी। इस फैसले को हार्वर्ड के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत माना जा रहा है।
🇺🇸 ट्रंप प्रशासन का विवादित आदेश
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विदेशी छात्रों को दाखिला देना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। आदेश में यह भी कहा गया था कि हार्वर्ड का माहौल “विदेशी छात्रों के लिए अनुपयुक्त” है।
🎓 7,000 छात्रों का भविष्य अधर में
सरकारी आदेश के बाद लगभग 7,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रों की पढ़ाई और वीज़ा की वैधता संकट में आ गई थी। कई छात्रों को या तो यूनिवर्सिटी छोड़नी पड़ती या अमेरिका में उनका कानूनी स्टेटस खत्म हो जाता। कोर्ट के इस हस्तक्षेप से अब उन्हें बड़ी राहत मिली है।
💰 रिसर्च फंडिंग और टैक्स छूट भी बनी थी टारगेट
यह विवाद केवल प्रवेश तक सीमित नहीं था। ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड की रिसर्च फंडिंग में कटौती, टैक्स छूट रद्द करने की चेतावनी, और विदेशी छात्रों से जुड़ी जानकारियों की मांग जैसे कई कठोर कदम उठाए थे। यहां तक कि हार्वर्ड का स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विज़िटर प्रोग्राम सर्टिफिकेट भी रद्द कर दिया गया था।
📜 ट्रंप का तर्क: राष्ट्रीय सुरक्षा
अपने आदेश में ट्रंप ने एक संघीय कानून का हवाला दिया था, जिसके तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वे ऐसे विदेशी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा सकें, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। उन्होंने इसमें आतंकी संगठनों से जुड़ाव जैसे अन्य कानूनों को भी जोड़ा।
निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ एक विश्वविद्यालय बनाम प्रशासन की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह इस बात की नजीर बन चुका है कि शिक्षा, आप्रवासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लिए गए फैसले कैसे हज़ारों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत का यह फैसला न केवल हार्वर्ड, बल्कि पूरे अमेरिकी उच्च शिक्षा तंत्र के लिए एक उम्मीद की किरण है।
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