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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और चीन कनेक्शन पर ट्रंप प्रशासन सख्त, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के दाखिले पर लगी रोक

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को लेकर कड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गहरे संबंध और परिसर में सुरक्षा उल्लंघनों का आरोप लगाते हुए, 2025-26 शैक्षणिक वर्ष से विदेशी छात्रों के नए दाखिलों पर रोक लगा दी है। इस कदम से हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर असर पड़ सकता है।

DHS का अल्टीमेटम: 72 घंटे में दें जवाब

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने हार्वर्ड को 22 मई को एक सख्त पत्र भेजा जिसमें यूनिवर्सिटी को 72 घंटे के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारी देने का आदेश दिया गया। इसमें कहा गया कि अगर यूनिवर्सिटी निर्देशों का पालन नहीं करती है, तो वह स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) से स्थायी रूप से प्रतिबंधित की जा सकती है।

7,000 से अधिक छात्र प्रभावित

इस आदेश का असर उन लगभग 7,000 विदेशी छात्रों पर पड़ सकता है जो वर्तमान में हार्वर्ड में पढ़ाई कर रहे हैं। DHS ने इन्हें सलाह दी है कि वे अमेरिका में अपनी कानूनी स्थिति बनाए रखने के लिए अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरण पर विचार करें।

आरोप: चीनी अर्धसैनिक समूहों से संबंध

DHS ने यह भी दावा किया कि हार्वर्ड ने 2024 तक एक चीनी अर्धसैनिक समूह के सदस्यों को अपने परिसर में आमंत्रित कर प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ है।

रिकॉर्ड साझा न करने पर कार्रवाई

DHS ने अप्रैल 2025 में हार्वर्ड से छात्र आचरण और विरोध से जुड़े वीडियो फुटेज समेत कई रिकॉर्ड मांगे थे। जब यूनिवर्सिटी द्वारा दी गई जानकारी अधूरी पाई गई, तो विभाग ने एक और मौका दिया। लेकिन दोबारा भी “अपर्याप्त जवाब” दिए जाने पर यह सख्त कदम उठाया गया।

यहूदी छात्रों और हमास पर सहानुभूति के आरोप

ट्रंप प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि हार्वर्ड का माहौल यहूदी छात्रों के लिए असुरक्षित बन गया है और परिसर में हमास समर्थक विचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की नस्ल और विविधता पर आधारित नीतियों की भी आलोचना की।

चीनी छात्रों पर विशेष प्रभाव

इस फैसले से खासतौर पर चीनी छात्रों को नुकसान पहुंचने की आशंका है, जो हार्वर्ड के अंतर्राष्ट्रीय छात्र समूह का एक बड़ा हिस्सा हैं। यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की “राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि” रखने वाली नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों की भी कड़ी निगरानी की जा रही है।

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