खामेनेई बोले – ‘डर दिखाओगे तो दुश्मन और दबाएगा’, इजरायल ने दिया करारा जवाब
तेहरान / तेल अवीव:
ईरान और इजरायल के बीच लगातार तेज हो रहे सैन्य संघर्ष के बीच दोनों देशों के नेता तीखे बयानों के साथ आमने-सामने आ गए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देशवासियों से साहस बनाए रखने का आह्वान किया है, वहीं इजरायल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने खामेनेई के “अस्तित्व को समाप्त” करने की चेतावनी दे डाली है।
🗨️ खामेनेई का संदेश – “अगर डर दिखाओगे, दुश्मन कभी नहीं छोड़ेगा”
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में खामेनेई ने ईरानी जनता से कहा:
“यदि दुश्मन को आभास हो जाए कि आप उससे डरते हैं, तो वह आपको कभी नहीं छोड़ेगा। अब तक आपने जिस साहस और दृढ़ता का परिचय दिया है, उसी को बनाए रखें।”
खामेनेई ने यह संदेश तेल अवीव, बीरशेबा और सोरोका मेडिकल सेंटर पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद साझा किया। उन्होंने कुरान का हवाला देते हुए लिखा:
“…और निःसंदेह, विजय केवल अल्लाह की ओर से है, और वह सत्य पर हमेशा आती है।”
🔥 इजरायल का जवाब – “अब खामेनेई का अस्तित्व अस्वीकार्य”
दूसरी ओर, हमले से बौखलाए इजरायल ने कड़ा पलटवार किया है। रक्षा मंत्री इज़राइल कात्ज़ ने कहा:
“ईरान ने इजरायल के अस्पताल पर हमला किया है। खामेनेई खुलेआम इजरायल के विनाश की बात करता है। ऐसे शासक का अस्तित्व अब स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
कात्ज़ ने यह भी जोड़ा कि IDF (इजरायली डिफेंस फोर्स) को इस बाबत निर्देश दे दिए गए हैं कि खामेनेई जैसे तानाशाह का अंत इजरायल की सुरक्षा नीति का हिस्सा बन चुका है।
🧨 ईरान ने दागीं दर्जनों मिसाइलें
ईरान की ओर से कई मिसाइलें तेल अवीव, होलोन, रमत गान और बीरशेबा पर दागी गईं। एक मिसाइल सोरोका मेडिकल सेंटर, जो दक्षिण इजरायल का एक प्रमुख अस्पताल है, पर गिरी, जिससे संरचनात्मक क्षति और कई घायल की खबरें आई हैं।
🌍 संकट की घड़ी में वैश्विक चिंता
यह बयानबाज़ी उस समय हो रही है जब क्षेत्र में युद्ध का विस्तार और अमेरिका की संभावित सैन्य भागीदारी की अटकलें दुनिया भर में चिंता का विषय बन चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र, रूस, चीन और यूरोपीय संघ जैसे वैश्विक शक्ति केंद्र दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर चुके हैं।
🔴 निष्कर्ष:
ईरान और इजरायल के बीच यह वाकयुद्ध अब सीधे नेतृत्व स्तर पर टकराव का रूप ले चुका है। खतरनाक बात यह है कि यह टकराव धार्मिक, वैचारिक और सामरिक तीनों स्तरों पर हो रहा है — और इसका प्रभाव न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक शांति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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