दमिश्क।
लगभग 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अमेरिका ने सीरिया में एक बार फिर अपना दूतावास खोला है। वर्ष 2012 में देश में बढ़ती आतंकी गतिविधियों और अस्थिरता के चलते अमेरिका ने दमिश्क स्थित अपने मिशन को बंद कर दिया था। अब, मौजूदा हालात और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर वाशिंगटन ने अपने राजनयिक संबंधों को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
गुरुवार को सीरिया की राजधानी में अमेरिकी झंडा एक बार फिर लहराता दिखाई दिया। यह क्षण केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई नरमी का संकेत भी है। सीरिया की सरकारी एजेंसी ‘सना’ के अनुसार, टॉम बैरक—जो पहले तुर्की में अमेरिका के राजदूत थे और अब सीरिया के लिए विशेष दूत नियुक्त किए गए हैं—ने इस नए दूतावास का औपचारिक उद्घाटन किया।
पृष्ठभूमि: पुराने तनाव, नया मोड़
2012 में, तत्कालीन राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद हुई हिंसक घटनाओं के कारण अमेरिका ने दमिश्क से अपने सारे राजनयिक स्टाफ को हटा लिया था। इसके साथ ही सीरिया पर विभिन्न आर्थिक और राजनयिक प्रतिबंध भी लगाए गए थे।
लेकिन अब अहमद अल-शरा के नेतृत्व में सीरिया की नई सरकार के साथ अमेरिका का रुख बदला हुआ नजर आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अल-शरा कभी एक ऐसे इस्लामी विद्रोही समूह से जुड़े रहे हैं जिसे अमेरिका अब भी आतंकवादी संगठन मानता है। इसके बावजूद, हाल ही में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति अल-शरा के बीच हुई मुलाकात को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश विभाग की प्रतिक्रिया
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक आधिकारिक बयान जारी कर टॉम बैरक की नई नियुक्ति की पुष्टि की। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए इस बयान में कहा गया,
“टॉम बैरक समझते हैं कि सीरिया के साथ साझेदारी के ज़रिये चरमपंथ पर लगाम लगाई जा सकती है, क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सकता है और अमेरिका समेत पूरी दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।”
निष्कर्ष
यह घटनाक्रम केवल अमेरिका और सीरिया के द्विपक्षीय संबंधों में ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में एक नई राजनयिक धारा की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में यह साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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