13 दिन में शास्त्री और परमाणु वैज्ञानिक की मौत, ऑपरेशन कहूटा की कहानी ने फिर बढ़ाई चर्चा
channel_009 | Special Report
भारत-पाकिस्तान के इतिहास में कई ऐसे अध्याय हैं, जिनके रहस्य आज भी बहस का विषय बने हुए हैं। इन्हीं में से एक कहानी जुड़ी है ऑपरेशन कहूटा से, जहां दावा किया जाता है कि पाकिस्तान चोरी-चुपके परमाणु बम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा था और भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उसके इस प्लान की भनक लगा ली थी।
कहानी की शुरुआत उस दौर से मानी जाती है, जब दक्षिण एशिया में परमाणु ताकत बनने की होड़ तेज हो रही थी। भारत में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद समझौते के बाद अचानक मौत हुई। इसी के कुछ समय आसपास भारत के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों से जुड़े घटनाक्रमों ने भी कई सवाल खड़े किए। इन घटनाओं को लेकर लंबे समय से अलग-अलग दावे और थ्योरी सामने आती रही हैं।
रिपोर्ट्स और चर्चित दावों के मुताबिक, पाकिस्तान के कहूटा परमाणु केंद्र पर भारतीय एजेंसियों की नजर थी। कहा जाता है कि भारतीय जासूसों ने बड़ी चतुराई से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी जुटाने की कोशिश की। यहां तक दावा किया जाता है कि वैज्ञानिकों के बालों के नमूने चुराकर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि वहां यूरेनियम संवर्धन जैसी गतिविधियां चल रही हैं या नहीं।
अगर इन दावों को मानें, तो यह खुफिया ऑपरेशन पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता था। हालांकि, ऑपरेशन कहूटा से जुड़े कई पहलू आज भी रहस्य, दावों और अधूरी जानकारियों के घेरे में हैं।
channel_009 निष्कर्ष:
ऑपरेशन कहूटा सिर्फ एक खुफिया मिशन की कहानी नहीं, बल्कि भारत-पाकिस्तान की परमाणु राजनीति, रहस्यमयी मौतों और जासूसी के उस दौर की झलक है, जिसने दक्षिण एशिया की सुरक्षा तस्वीर को हमेशा के लिए बदल दिया।
आपकी राय क्या है — क्या ऑपरेशन कहूटा जैसे पुराने खुफिया मिशनों की सच्चाई सार्वजनिक होनी चाहिए? कमेंट में बताइए।

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