2023 की हार, दिल्ली का सर्वे और कटा टिकट—क्या दतिया में खत्म हो रहा नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक दौर?
channel_009 | Political News
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या दतिया की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहे नरोत्तम मिश्रा का दौर अब कमजोर पड़ने लगा है।
नरोत्तम मिश्रा को 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि उपचुनाव में पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जताएगी। लेकिन भाजपा ने टिकट किसी नए चेहरे को देकर स्थानीय समीकरण बदलने का संकेत दिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उम्मीदवार तय करने से पहले पार्टी ने दिल्ली स्तर पर सर्वे और स्थानीय फीडबैक लिया था। माना जा रहा है कि चुनावी जीत की संभावना, संगठन की रिपोर्ट और जनता के रुझान को ध्यान में रखते हुए आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगी।
हालांकि, टिकट कटने के बाद जिस तरह समर्थक सड़कों पर उतरे, हाईवे जाम किया गया और स्थानीय पदाधिकारियों व पार्षदों ने इस्तीफे दिए, उससे साफ है कि नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दतिया में उनका मजबूत समर्थक वर्ग और पुराना संगठनात्मक नेटवर्क आज भी मौजूद है।
अब असली परीक्षा यह होगी कि नरोत्तम मिश्रा पार्टी के फैसले को किस तरह लेते हैं। यदि वह उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय प्रचार करते हैं, तो भाजपा अंदरूनी असंतोष को नियंत्रित कर सकती है। लेकिन समर्थकों की नाराजगी जारी रही, तो चुनावी नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।
channel_009 निष्कर्ष:
एक हार और टिकट कटने से नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक दौर समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि दतिया में उनकी निर्विवाद पकड़ को पहली बार गंभीर चुनौती मिली है।
क्या नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव अब कम हो रहा है, या वे आने वाले समय में फिर मजबूत वापसी करेंगे? कमेंट में अपनी राय बताइए।
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