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क्या था मामला?
4 साल पहले मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस वे के निर्माण के दौरान गांव का प्राथमिक स्कूल तोड़ दिया गया। बदले में सरकार को मुआवजा तो मिला, लेकिन गांव में सरकारी जमीन नहीं होने की वजह से स्कूल का नया भवन नहीं बन पाया। इसके कारण 40 बच्चों को रोज़ 1.5 किमी दूर दूसरे गांव के स्कूल में जाना पड़ रहा था।
बच्चों की परेशानी देख भावुक हुए दो भाई
गांव के ही रमेश मईड़ा और तोलाराम मईड़ा ने जब बच्चों को रोज़ परेशान होते देखा तो उन्होंने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी निजी जमीन सरकार को स्कूल के लिए दान कर दी।
अब इसी जमीन पर गांव में ही स्कूल बनाया जाएगा, जिससे बच्चों को दूर नहीं जाना पड़ेगा और वे अपने गांव में ही पढ़ाई कर सकेंगे।
यह पहल न सिर्फ गांव के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह दिखाता है कि सामूहिक भलाई के लिए व्यक्तिगत योगदान कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।
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