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साइबर क्राइम: 21वीं सदी का सबसे बड़ा खतरा, सजगता से ही बचाव संभव

भीलवाड़ा। साइबर क्राइम आज 21वीं सदी का सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। साइबर अपराधी अब शौकिया नहीं, बल्कि पेशेवर और प्रायोजित अपराधी बन चुके हैं जो जानकारी चुराने और पैसे की सूरत में बड़े नुकसान की योजना बनाते हैं। ऐसे अपराधियों द्वारा कई तरह के साइबर हमले किए जाते हैं, और केवल सजग रहकर ही हम इससे बच सकते हैं।

साइबर ठगी में महिलाएं अक्सर शिकार होती हैं क्योंकि वे भावुक होती हैं और ओटीपी आदि जानकारी शेयर कर देती हैं। इसके बाद ठगी का शिकार होने के बाद महिलाएं घटना को छुपा देती हैं, जिससे अपराध तेजी से बढ़ते हैं। यदि कभी ऐसी घटना हो, तो तुरंत साइबर क्राइम सेल या नजदीकी थाने में जानकारी दें ताकि अपराधी पकड़े जाएं और नुकसान को कम किया जा सके।

साइबर क्राइम के तीन प्रमुख प्रकार हैं:

  1. व्यक्तिगत नुकसान
  2. आर्थिक नुकसान
  3. सरकारी डाटा का चोरी होना

बचाव के तरीके:

  1. अनजान लिंक को न खोलें।
  2. ओटीपी और व्यक्तिगत जानकारी को किसी से शेयर न करें।
  3. घटना होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
  4. मोबाइल का उपयोग केवल जरूरत के समय करें और उसे कम से कम चलाएं।

पासवर्ड को मजबूत रखें: साइबर जालसाज कमजोर पासवर्ड का फायदा उठाते हैं। इसलिए, पासवर्ड को मजबूत और जटिल बनाएं। जन्मदिन, मोबाइल नंबर या वाहन नंबर जैसे आसान पासवर्ड को न अपनाएं।

ऑनलाइन शॉपिंग में सावधानी: ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है। जालसाज फेक एप्लिकेशन और वेबसाइट बनाकर ठगी करते हैं। इसलिए, हमेशा वैध और प्रमाणित साइट्स से ही शॉपिंग करें।

सुझाव: इस चर्चा के दौरान राजेन्द्र मार्ग विद्यालय के प्रधानाचार्य श्यामलाल खटीक, उप प्रधानाचार्य राजेश कुमार शर्मा और अन्य शिक्षकों ने साइबर क्राइम से बचाव के उपाय साझा किए और विद्यार्थियों को इस बारे में जागरूक किया।

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