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अपनी भाषा पर करें गर्व, घर पर मातृभाषा में करें बात

राजस्थान पत्रिका परिचर्चा
राजस्थान पत्रिका के हुब्बल्ली संस्करण के 20वें स्थापना दिवस और राजस्थान दिवस के अवसर पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसका विषय था – “माटी से जुड़ाव: म्हारो प्यारो राजस्थान।” इस चर्चा में प्रवासियों ने राजस्थान की संस्कृति, परंपराएं, रीति-रिवाज और भाषा को लेकर अपने विचार साझा किए।

राजस्थान की गौरवशाली विरासत

राजस्थान को मरुप्रदेश भी कहा जाता है। यह अपनी संस्कृति, वीरता, परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह प्रदेश थार मरुस्थल और अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है, जो इसकी भौगोलिक विशेषताओं को अनोखा बनाता है। यहां के लोग अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों से गहराई से जुड़े हुए हैं।

राजस्थान की समृद्ध संस्कृति

प्रवासियों ने कहा कि राजस्थान की संस्कृति इसकी असली पहचान है। यहां के लोकनृत्य जैसे घूमर, कालबेलिया और चकरी पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। राजस्थानी लोकगीत जनजीवन की झलक दिखाते हैं। इसके अलावा, यहां के मेले और त्योहार न सिर्फ धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करते हैं।

बच्चों को राजस्थानी भाषा सिखाने की जरूरत

राजस्थान जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के ट्रस्टी गौतम खींवेसरा ने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए और घर में बच्चों को राजस्थानी में बोलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साल में कम से कम एक बार राजस्थान जाना चाहिए, ताकि माटी से जुड़ाव बना रहे।

राजस्थान से गहरा रिश्ता

संघ के कार्यकारिणी सदस्य राजेश श्रीश्रीमाल ने बताया कि वह हर साल दो बार राजस्थान जाते हैं। 2023 में उनके गांव में तीन दिवसीय सम्मेलन हुआ था, जिसमें प्रवासियों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और परंपराओं को जीवंत किया।

राजस्थान का अनूठा खान-पान

संघ के सदस्य महेन्द्र बन्दामूथा ने कहा कि राजस्थान का खान-पान बिल्कुल अलग और स्वादिष्ट होता है। दाल-बाटी, सोगरा जैसे पारंपरिक व्यंजन अपनी खास पहचान रखते हैं। राजस्थान में शादी-ब्याह या अन्य आयोजनों में प्रवासी विशेष रूप से शामिल होते हैं, जिससे उनके राज्य से संबंध मजबूत रहते हैं।

राजस्थान में व्यापार की बढ़ती संभावनाएं

अरटवाड़ा निवासी मुल्तानमल गादिया ने बताया कि अब राजस्थान में व्यापार के नए अवसर बढ़ रहे हैं। मंदिरों में होने वाले धार्मिक आयोजनों के लिए भी लोग अक्सर राजस्थान जाते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर

नाडोल निवासी रमेश बिदामिया ने बताया कि नाडोल में हर साल गुरु मेला लगता है, जिसमें तीन दिन तक धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। यहां करीब 550 जैन परिवार और 9 जैन मंदिर हैं, जो राजस्थान की समृद्ध धार्मिक धरोहर को दर्शाते हैं।

राजस्थान में सुकून का अनुभव

सिवाना के रमेश भंसाली ने कहा कि राजस्थान की संस्कृति महान है और वहां जाकर जो सुकून महसूस होता है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

निष्कर्ष:
राजस्थान की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को बनाए रखने के लिए प्रवासियों को अपनी मातृभाषा में बात करनी चाहिए और अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए।

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