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श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के छात्रों के साथ अन्याय: सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज क्यों नहीं?

श्रीगंगानगर।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों में आज तक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना नहीं हो सकी है। इस कारण यहां के हजारों छात्रों को या तो महंगी फीस देकर निजी कॉलेजों में पढ़ना पड़ता है या फिर दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। पिछले कई वर्षों से यहां के छात्र सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें सिर्फ निराशा ही मिली है। फिलहाल, छात्रों को 250 किलोमीटर दूर बीकानेर के सरकारी कॉलेज का सहारा लेना पड़ता है।


निजी कॉलेज महंगे, फिर भी गुणवत्ता नहीं

श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने के कारण छात्रों को निजी कॉलेजों में पढ़ना पड़ता है। यहां बीटेक की सालाना फीस 1.50 लाख से 1.80 लाख रुपए तक है, ऊपर से हॉस्टल का खर्च भी अलग। वहीं सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में पूरी पढ़ाई लगभग 2.50 से 2.80 लाख रुपए में हो जाती है और पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इस कारण अच्छी शिक्षा सिर्फ अमीर छात्रों तक ही सीमित रह गई है।


डिप्लोमा के विकल्प हैं, पर डिग्री नहीं

श्रीगंगानगर में चौधरी मालू भांभू राजकीय पॉलिटेक्निक जैसे डिप्लोमा कॉलेज हैं, लेकिन बीटेक डिग्री के लिए कोई सरकारी कॉलेज नहीं है। इससे मजबूर होकर छात्रों को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है।


राजस्थान के दूसरे जिलों में बेहतरीन सरकारी कॉलेज

राजस्थान के अजमेर, भरतपुर, बाड़मेर, बीकानेर, धौलपुर, जोधपुर और भीलवाड़ा में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जहां आधुनिक लैब, पुस्तकालय, तकनीकी प्रशिक्षण और इंडस्ट्री से जुड़ाव की सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं।


स्थानीय विशेषज्ञों की राय

  • भूपेश शर्मा, एजुकेशन एक्सपर्ट:
    “कई छात्र निजी कॉलेजों की चमक-धमक में फंस जाते हैं और बाद में ना अच्छी पढ़ाई मिलती है, ना प्लेसमेंट। अगर यहां सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुलता है तो छात्रों का भविष्य बेहतर हो सकता है।”

  • सरोज पंवार, इंजीनियर:
    “सरकारी और निजी कॉलेजों की फीस में बहुत फर्क है। श्रीगंगानगर में सरकारी कॉलेज बनने से गरीब छात्रों को भी बीटेक की पढ़ाई का मौका मिलेगा और इससे शिक्षा का स्तर भी सुधरेगा।”


निष्कर्ष:
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के छात्रों को भी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज का हक मिलना चाहिए। इससे न केवल उनकी पढ़ाई सस्ती होगी बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य भी मिलेगा। अब जरूरत है कि सरकार इस दिशा में जल्द कदम उठाए।

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