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जयपुर। जयपुर बम धमाकों के 17 साल बाद अदालत ने आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। फैसले के बाद पीड़ित परिवारों की आंखों में आंसू थे, लेकिन उनके चेहरों पर सुकून भी नजर आया। उन्होंने कहा कि दर्द तो हमेशा रहेगा, लेकिन इस फैसले से जख्मों पर मरहम जरूर लगा है।
फैसले से आया सुकून:
जैसे ही यह खबर मिली कि आरोपियों को उम्र कैद हुई है, पीड़ित परिवारों की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि कोर्ट पर भरोसा था कि इंसाफ मिलेगा। मृतकों के परिजनों ने कहा कि हालांकि अपना खोया हुआ वापस नहीं मिल सकता, लेकिन न्याय मिलने से दिल को थोड़ा सुकून जरूर मिला है।
रमा देवी शर्मा का दर्द:
गणगौरी बाजार निवासी 70 साल की रमा देवी शर्मा भी कोर्ट में मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि बम धमाके के समय वह अपने पति के साथ चौपड़ में थीं और दोनों घायल हो गए थे। कुछ दिन पहले उनके पति का निधन हो गया और अब वह अकेली रह गई हैं। रमा देवी ने कहा, “उस काली रात को मैं आज भी नहीं भूल सकती। चारों तरफ चीख-पुकार और खून से लथपथ सड़कें आज भी याद आती हैं। अपराधियों को सजा मिलने से दुख थोड़ा कम हुआ है।”
मुस्कान तंवर की भावनाएं:
मुस्कान तंवर, जिनके पिता घनश्याम सिंह तंवर बम धमाके में मारे गए थे, ने कहा, “मैं उस समय 10 साल की थी। आज, 17 साल बाद, दोषियों को सजा मिली है। अब जाकर हमें चैन की नींद आएगी।“
राजेंद्र साहू की व्यथा:
राजेंद्र साहू, जिनकी पत्नी सुशीला साहू धमाकों में मारी गई थीं, ने कहा, “17 साल से मैं अकेला हूं। हर खुशी के मौके पर उनकी याद आती है। आज लगता है कि उन्हें भी शांति मिली होगी।“
मुबीना का दर्द:
मुबीना, मृतक हनीफ खान की पत्नी, ने कहा, “इंसानियत के दुश्मनों को सजा मिली है, जिससे दिल को सुकून मिला है। दुआ करती हूं कि ऐसा हादसा फिर कभी न हो।“
यशवंत सिंह की बात:
यशवंत सिंह, जिनकी पत्नी भुवनेश्वरी इस हादसे में मारी गई थीं, ने कहा, “देर से सही, लेकिन आज इंसाफ मिल गया। अब प्रयास होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।“
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