हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, जिसे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ में गिना जाता है, आजकल एक बड़े राजनीतिक विवाद में फंस गई है। वजह है—पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा 2.2 अरब डॉलर की फंडिंग रोकना। इसके जवाब में हार्वर्ड ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
🔥 क्या है मामला?
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि हार्वर्ड और कुछ अन्य प्रतिष्ठित संस्थान फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों को रोकने में नाकाम रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि यह प्रदर्शन यहूदी विरोधी भावनाओं से भरे हुए थे। इसी आधार पर हार्वर्ड की हेल्थ रिसर्च से जुड़ी फंडिंग रोकी गई है।
🏛️ हार्वर्ड का पलटवार
हार्वर्ड ने ट्रंप सरकार की इस कार्रवाई को शैक्षणिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है। यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष एलन गार्बर ने कहा कि सरकार द्वारा दबाव डालने और जांच शुरू करने का उद्देश्य यूनिवर्सिटी को झुकाना है—जिसे हार्वर्ड ने सिरे से नकार दिया।
⚖️ अब कोर्ट में होगी टक्कर
ट्रंप सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग भी रोक सकती है। इसके जवाब में हार्वर्ड ने केस दर्ज कर दिया है और इसे शैक्षिक संस्थानों की स्वतंत्रता के लिए निर्णायक लड़ाई बताया है।
🌍 दुनिया भर के छात्र प्रभावित
हार्वर्ड में दुनिया भर से छात्र पढ़ने आते हैं। वर्ष 2024-25 में यूनिवर्सिटी में नामांकित 27.2% छात्र अंतरराष्ट्रीय हैं। ऐसे में फंडिंग कटौती का असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जाएगा।
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