मालाखेड़ा:
दादर ग्राम पंचायत में एक बालक है, जिसका नाम तस्लीम है और उसकी एक अजीब आदत है। उसे पेट्रोल की गंध से तसल्ली मिलती है। 5 साल से दादर में रहने वाले अख्तर खान के पुत्र तस्लीम को जब तक पेट्रोल की गंध नहीं मिलती, वह शांत नहीं हो पाता। वह मूक और बधिर है, यानी न तो वह सुन सकता है और न ही बोल सकता है। बचपन से ही उसे बाइक के पास बैठकर पेट्रोल की गंध लेने की आदत लग गई, जो अब उसकी जरूरत बन गई है।
तस्लीम पेट्रोल की गंध के बिना श्वास भी नहीं ले सकता और अब उसे इसकी लत लग चुकी है। पेट्रोल पंप पर वह किसी के साथ जाता है और घंटों वहां की गंध लेता रहता है। पंप के कर्मचारी का कहना है कि तस्लीम के माता-पिता गरीब हैं, और उनका बेटा पेट्रोल की गंध के बिना जीवन नहीं चला सकता है।
अख्तर खान, तस्लीम के पिता, ने बताया कि उनका परिवार बहुत गरीब है। वह मजदूरी करते हैं और परिवार का पालन-पोषण उसी से करते हैं। उनका राशन कार्ड नहीं बन पाया है और वे 5 साल से दादर क्षेत्र में रह रहे हैं। परिवार को किसी सरकारी योजना का भी लाभ नहीं मिल रहा है। तस्लीम के इलाज के लिए आर्थिक मदद की आवश्यकता है क्योंकि पेट्रोल की गंध से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य अधिकारी का बयान:
लोकेश मीणा, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, मालाखेड़ा ने कहा कि पेट्रोल की गंध से शरीर के फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है और लीवर भी संक्रमित हो सकता है। तस्लीम का इलाज जरूरी है और परिवार को अस्पताल में आकर मदद प्राप्त करनी चाहिए।
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