24 अप्रैल, 2025 | विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट
एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत चल रही थी, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कदम ने बातचीत की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ईरान ने इसे “वार्ता की भावना के विरुद्ध” बताते हुए कड़ी आलोचना की है।
वार्ता की उम्मीदों पर पानी?
दोनों देशों के बीच चल रही परमाणु वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। अमेरिका की ओर से यह संकेत दिया गया था कि यदि ईरान परमाणु हथियारों के विकास से पीछे हटता है, तो उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। लेकिन इसी दौरान अमेरिका द्वारा नए प्रतिबंध लगाए जाने से वार्ता की प्रक्रिया बाधित होती दिख रही है।
ईरानी प्रतिक्रिया – “ये कदम सद्भावना को ठेस पहुंचाते हैं”
ईरान की सरकारी एजेंसी के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाकेई ने इस फैसले को “अवैध” और “धमकाने वाला” करार दिया। उनका कहना था:
“ये प्रतिबंध अमेरिका की वार्ता में गंभीरता की कमी को दर्शाते हैं और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।”
क्यों लगाए गए प्रतिबंध?
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, ईरान का एक व्यवसायी और उसके अंतरराष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क पर यह आरोप है कि वह ईरानी तेल और गैस को गुप्त रूप से विदेशों में बेचकर उससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल हथियार कार्यक्रम और सशस्त्र संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह, हमास और हूती) को फंडिंग में करता है।
अमेरिका का “अधिकतम दबाव” अभियान
अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि अमेरिका ईरान पर “अधिकतम दबाव” की नीति के तहत प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करता रहेगा।
“जब तक ईरान पारदर्शिता नहीं दिखाता, अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।”
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