24 अप्रैल, 2025 | विशेष रिपोर्ट
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक बैठक के दौरान यह उम्मीद जताई कि भारत जल्द ही इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला पहला देश बन सकता है। उनका मानना है कि भारत के साथ बातचीत “आसान और सीधी” है, जिससे डील को अंतिम रूप देना संभव हो सकता है।
टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 26% जवाबी शुल्क को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनातनी रही है। हालांकि अमेरिका ने इस शुल्क को 90 दिनों के लिए टाल दिया है, जो 8 जुलाई को समाप्त हो रहा है। वर्तमान में भारत पर 10 प्रतिशत का सामान्य टैरिफ लागू है, लेकिन व्यापार समझौता इस बोझ को कम कर सकता है।
डील पर क्या बोले अमेरिकी अधिकारी
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, स्कॉट बेसेंट ने कहा:
“भारत ने भारी शुल्क नहीं लगाया है, ना ही वहां कोई बड़ी गैर-शुल्क बाधाएं हैं। मुद्रा प्रबंधन भी स्थिर है और सब्सिडी न्यूनतम हैं – इसलिए भारत के साथ समझौता आसान है।”
उन्होंने यह टिप्पणी वाशिंगटन में विश्व बैंक और IMF की वार्षिक बैठक के दौरान की, जहां भारत के साथ व्यापार वार्ता पर चर्चा की गई।
भारत से अमेरिका की अपेक्षाएं
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नीति रही है कि अन्य देश अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और बाधाएं कम करें ताकि अमेरिका का व्यापार घाटा कम हो। जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत से आग्रह किया कि वह:
-
अमेरिकी उत्पादों के लिए बाज़ार खोलें
-
गैर-शुल्क बाधाएं समाप्त करें
-
अमेरिकी ऊर्जा और सैन्य उपकरणों की खरीद बढ़ाएं
भारत-अमेरिका व्यापार संतुलन
2024 में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा 45.7 अरब डॉलर रहा। जबकि अमेरिका में भारत की वस्तुओं की हिस्सेदारी महज 3% रही।
CHANNEL009 Connects India

