Breaking News

RGHS योजना में सरकारी कर्मचारी और दवा विक्रेता परेशान

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में दवा सप्लाई को लेकर विवाद

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को पूरी दवा नहीं मिल पा रही है। इस बीच, RGHS और दवा विक्रेताओं के बीच बिल भुगतान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

दवा विक्रेताओं की शिकायत
दवा विक्रेताओं का कहना है कि उनके बिलों पर बिना वजह आपत्ति (ऑब्जेक्शन) लगाई जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले बिलों को रोक दिया जाता है, फिर बाद में बिना किसी बदलाव के पास कर दिया जाता है। इससे दवा विक्रेता काफी परेशान हैं।

मुख्य सचिव से शिकायत
इस मामले को लेकर दवा विक्रेताओं ने राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांशु पंत से शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि बिलों पर अनावश्यक आपत्तियां लगाने और बाद में उन्हें मंजूरी देने की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए।

RGHS अधिकारियों की सफाई
RGHS अधिकारियों का कहना है कि वे सिर्फ नियमों का पालन कर रहे हैं। उनका काम दस्तावेजों की सही जांच करना है और अगर कोई गलती मिलती है, तो उसे ठीक करना जरूरी होता है।

मरीजों को हो रही परेशानी

सरकार के पास RGHS के दवा विक्रेताओं को भुगतान करने के लिए हमेशा बजट नहीं होता, जिससे कई बार दवा विक्रेता हड़ताल पर चले जाते हैं। दवा आपूर्ति ठप होने से सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को परेशानी होती है। दवा विक्रेताओं का आरोप है कि महीनों से उनके भुगतान अटके हुए हैं, जिस कारण वे जरूरी दवाइयां नहीं रख पा रहे हैं। वहीं, RGHS अधिकारी इसे एक सतत (चलने वाली) प्रक्रिया बताते हैं और समय-समय पर भुगतान होने की बात कह रहे हैं।

दवा विक्रेताओं की समस्याएं और तर्क

  1. डॉक्टर ने पर्ची पर सही जांच नहीं लिखी या जांच के अनुसार दवा नहीं दी

    • तर्क: डॉक्टर की गलती के लिए दवा विक्रेता को दोषी क्यों ठहराया जा रहा है?

  2. पर्ची को साफ अपलोड नहीं किया गया

    • तर्क: अस्पताल या मरीज खुद भी पर्ची अपलोड कर सकते हैं, फिर दवा विक्रेता को दोष क्यों दिया जा रहा है?

  3. दवा विक्रेता ने वह दवा दी, जो RGHS पोर्टल पर नहीं थी

    • तर्क: दवा का नाम RGHS पोर्टल पर पहले से ही दर्ज होता है, विक्रेता नई दवा की एंट्री कर ही नहीं सकता।

  4. पर्ची पर बीपी, वजन, तापमान और पल्स रेट नहीं लिखा गया

    • तर्क: ये जानकारी देना डॉक्टर या मरीज का काम है, दवा विक्रेता को इसका अधिकार नहीं है।

इस विवाद के चलते मरीजों को भारी परेशानी हो रही है और जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।

About admin

Check Also

निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 गाड़ियां, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने वाहन कम करने से किया इनकार!

बिहार में मंत्री के काफिले पर सियासत तेज, निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?