इस्लामाबाद: भारत से बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की नौसेना की हालत पर बड़ा खुलासा हुआ है। नई सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, पाकिस्तान की अधिकांश पनडुब्बियां इस समय मरम्मत या उन्नयन के दौर से गुजर रही हैं और केवल दो ही समुद्री अभियानों के लिए तैयार हैं। इसका मतलब है कि अरब सागर में भारत के लिए रणनीतिक बढ़त बनाना अब और भी आसान हो सकता है।
मुख्य बातें:
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पाकिस्तान की सिर्फ दो पनडुब्बियां फिलहाल ऑपरेशनल
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बाकी पनडुब्बियां मरम्मत या अपग्रेडेशन के दौर में
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भारत के लिए समुद्री रणनीति में जबरदस्त अवसर
कराची से ली गईं सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली हकीकत
मार्च 2025 में कराची नेवल डॉकयार्ड और ओरमारा नेवल बेस से ली गई सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान की पनडुब्बी क्षमता की असल स्थिति उजागर कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की आठ ऑपरेशनल पनडुब्बियों में से पांच मरम्मत या अपग्रेडिंग के कारण निष्क्रिय हैं, एक पनडुब्बी अभी भी चीन से डिलीवर नहीं हुई है, और सिर्फ दो Agosta-90B क्लास की पनडुब्बियां ही समुद्र में तैनाती के लिए तैयार हैं।
पाक नौसेना की कमजोरी का गंभीर संकेत
विश्लेषकों का कहना है कि कराची डॉकयार्ड में पड़ी पनडुब्बियों की स्थिति से साफ है कि पाकिस्तान की नौसेना की डिटरेंस क्षमता फिलहाल बेहद कमजोर है। DefenceOSINT और Covert Shores जैसे भरोसेमंद ओपन सोर्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पाकिस्तानी पनडुब्बियों में से अधिकांश बिना चालक दल के पड़ी हुई हैं या भारी मरम्मत में व्यस्त हैं।
चीन से ऑर्डर, लेकिन डिलीवरी अटकी
पाकिस्तान ने चीन से 8 नई Type-039A (Hangor-class) पनडुब्बियों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से पहली 2024 में मिलने वाली थी। लेकिन तकनीकी दिक्कतों और पाकिस्तान के आर्थिक हालात के चलते डिलीवरी में देरी हो रही है। नतीजा यह है कि अरब सागर में पाकिस्तान की मौजूदगी और भी कमजोर हो गई है।
भारत के लिए रणनीतिक बढ़त
भारतीय नौसेना के पास फिलहाल 16 से ज्यादा पारंपरिक पनडुब्बियां और परमाणु ऊर्जा से संचालित INS अरिहंत जैसी शक्तिशाली संपत्ति है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात युद्ध की ओर बढ़ते हैं, तो भारतीय नौसेना पाकिस्तान के समुद्री रास्तों को आसानी से ब्लॉक कर सकती है। इससे न केवल पाकिस्तान की सप्लाई लाइनों पर असर पड़ेगा, बल्कि उसकी नौसेना की बची-खुची ताकत भी बुरी तरह पंगु हो जाएगी।
नौसेना संतुलन भारत के पक्ष में
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा परिदृश्य में पाकिस्तान की नौसेना लगभग शून्य डिटरेंस की स्थिति में पहुंच गई है। अगर जल्द ही उनकी नई पनडुब्बियां नहीं आतीं और मौजूदा प्लेटफॉर्म्स को अपग्रेड नहीं किया जाता, तो अरब सागर में भारत की बढ़त निर्णायक हो सकती है। आने वाले महीनों में यह स्थिति भारत की समुद्री रणनीतियों को और मजबूत कर सकती है।
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