बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर चुनाव कराने का दबाव लगातार बढ़ रहा है, और अब इस दबाव को और हवा देने वाली हैं देश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (बांग्लादेश नेशनल पार्टी) की नेता खालिदा जिया, जो लंदन से स्वदेश लौट रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, खालिदा जिया 5 मई को बांग्लादेश पहुंचेंगी। यह वही समय है जब यूनुस पर समयबद्ध चुनाव कराने की मांग जोरों पर है। यूनुस, जो शेख हसीना के तख्तापलट के बाद अगस्त 2024 में अंतरिम सरकार के प्रमुख बनाए गए थे, अब तक चुनाव कराने में नाकाम रहे हैं।
चुनाव की टालमटोल, बढ़ती नाराज़गी
मोहम्मद यूनुस ने पहले दिसंबर 2025 तक आम चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन अब उन्होंने जून 2026 की समयसीमा की बात छेड़ दी है। हाल ही में उन्होंने बयान दिया कि फिलहाल देश को चुनाव की जरूरत नहीं है, क्योंकि अंतरिम सरकार चुनी हुई सरकार से कहीं ज़्यादा जवाबदेह है। इस बयान ने बीएनपी को और आक्रामक कर दिया है।
खालिदा की वापसी से बढ़ेगा दबाव
खालिदा जिया की वापसी को बीएनपी के लिए एक बड़ा सियासी मौका माना जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगर जल्द चुनाव होते हैं, तो सत्ता में वापसी की संभावना प्रबल है। खालिदा की सक्रियता यूनुस के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है और उनकी अंतरिम सरकार की वैधता पर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विरासत और संघर्ष
तीन बार देश की प्रधानमंत्री रह चुकीं खालिदा जिया को शेख हसीना की सरकार के दौरान जेल में डाला गया था। हसीना के सत्ता से हटने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया, जिसके बाद वे इलाज के लिए लंदन रवाना हो गई थीं। अब लंबे अंतराल के बाद खालिदा फिर से बांग्लादेश की राजनीति में वापसी कर रही हैं। उनके पति, पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान, देश की सेना के प्रमुख भी रह चुके हैं, जिससे उनकी राजनीतिक विरासत और भी मज़बूत मानी जाती है।
क्या दोहराया जाएगा शेख हसीना का इतिहास?
मौजूदा हालात को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोहम्मद यूनुस भी शेख हसीना की तरह सत्ता से बेदखल किए जा सकते हैं, यदि उन्होंने चुनाव में और देरी की। खालिदा की वापसी इस घटनाक्रम को और तेज़ करने वाली साबित हो सकती है।
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