वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए संघर्षविराम के बाद अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने न सिर्फ दोनों देशों की सराहना की, बल्कि लंबे समय से विवादित कश्मीर मुद्दे के समाधान की संभावनाओं की भी बात की।
🔹 संघर्षविराम को बताया ऐतिहासिक फैसला
ट्रंप ने “ट्रुथ सोशल” पर एक पोस्ट में लिखा,
“मुझे भारत और पाकिस्तान के नेताओं पर गर्व है, जिन्होंने विवेक, संयम और दूरदर्शिता दिखाते हुए संघर्ष को रोका। यह टकराव व्यापक जनहानि और विनाश में बदल सकता था, जिससे लाखों निर्दोष नागरिक प्रभावित होते।”
उन्होंने इस फैसले को “बहादुरी और नेतृत्व का प्रतीक” बताया और दोनों देशों के प्रयासों की सराहना की।
🔹 अमेरिका की भूमिका और भविष्य की योजना
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने इस निर्णय तक पहुंचने में एक सहयोगी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा,
“मुझे खुशी है कि अमेरिका इस ऐतिहासिक और साहसी कदम में मदद कर सका।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत करना चाहता है।
🔹 कश्मीर को लेकर दिया बड़ा संकेत
सबसे अहम बात यह रही कि ट्रंप ने कश्मीर विवाद का जिक्र करते हुए इसे हल करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा:
“मैं दोनों देशों के साथ मिलकर यह देखने के लिए काम करूंगा कि क्या ‘हजार वर्षों’ के बाद कश्मीर को लेकर कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।”
🔹 ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
बात दें कि यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकवादी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। भारत ने यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के बाद की थी, जिसमें कई आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई। भारत ने स्पष्ट किया था कि यह कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए की गई थी, न कि किसी सैन्य प्रतिष्ठान या आम नागरिक पर।
निष्कर्ष: ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि क्या भारत और पाकिस्तान इस दिशा में किसी ठोस पहल के लिए तैयार होंगे।
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