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43 वर्षों बाद मिला अपने सैनिक का शव, सीरिया में इजराइल के विशेष ऑपरेशन की सफलता

तेल अवीव/दमिश्क: इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और सेना IDF ने मिलकर एक गोपनीय और जटिल मिशन को अंजाम देते हुए 1982 के लेबनान युद्ध में लापता हुए अपने सैनिक सार्जेंट प्रथम श्रेणी जवी फेल्डमैन के शव को सीरिया से बरामद किया है। यह मिशन इजराइल के लिए न केवल भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था बल्कि यह दशकों से चले आ रहे प्रयासों की परिणति भी है।

🔹 सुल्तान याकूब की लड़ाई से हुआ था लापता

जवी फेल्डमैन 1982 में बेका घाटी के सुल्तान याकूब क्षेत्र में सीरियाई सेना के साथ टकराव के दौरान लापता हो गए थे। इस संघर्ष में इजराइली सेना ने 21 जवान खोए थे, जबकि 30 से अधिक घायल हुए थे। फेल्डमैन के साथ-साथ येहुदा काट्ज और जाचरी बाउमेल भी लापता हुए थे। बाउमेल के अवशेष 2019 में वापस लाए गए थे।

🔹 सीरिया में चला गुप्त ऑपरेशन

IDF और मोसाद द्वारा साझा बयान में बताया गया कि फेल्डमैन के अवशेष सीरिया की धरती पर एक बेहद संवेदनशील ऑपरेशन के ज़रिए हासिल किए गए। इस प्रक्रिया में गहन खुफिया अनुसंधान, दुश्मन क्षेत्र में अभियान और सटीक सूचना पर आधारित कई स्तरों की गतिविधियाँ शामिल थीं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से मिशन की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

🔹 नेतन्याहू और रक्षा मंत्री का बयान

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस उपलब्धि पर कहा, “हमने कभी हार नहीं मानी। जवी को खोजने के प्रयास एक पल के लिए भी नहीं थमे।”
वहीं, इजराइली रक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि जैसे बाउमेल और अब फेल्डमैन को वापस लाया गया, वैसे ही येहुदा काट्ज की भी तलाश जारी रहेगी।

🔹 पहले भी हो चुकी हैं कामयाबियां

बाउमेल का शव यारमौक शरणार्थी शिविर से रूसी सहयोग के माध्यम से बरामद किया गया था। साथ ही, 2016 में रूस द्वारा युद्ध में लापता एक इजराइली टैंक भी लौटाया गया था। वर्तमान में, IDF दक्षिणी सीरिया में कई स्थानों पर तैनात है, जहां वे संभावित खतरनाक हथियारों को शत्रु के हाथों में जाने से रोकने के लिए निगरानी कर रहे हैं।

🔹 परिवारों की प्रतिक्रिया

फेल्डमैन के अवशेष की वापसी ने उनके परिजनों के साथ-साथ पूरे इजराइली समाज में गहरा सुकून और सम्मान का भाव पैदा किया है। बंधक मंच ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे “न्याय की ओर एक और कदम” बताया।


निष्कर्ष:
यह मिशन इजराइल के सुरक्षा प्रतिष्ठानों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। ऐसे अभियान यह दर्शाते हैं कि एक सैनिक को कभी भुलाया नहीं जाता, चाहे समय कितना ही क्यों न बीत जाए।

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