भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई कोचों ने अपनी छाप छोड़ी है, लेकिन गौतम गंभीर की कोचिंग शैली उन्हें एक अलग दिशा में ले जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर ने अपनी कोचिंग के दौरान वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ स्पष्ट और सख्त संवाद स्थापित किया है, जो कुछ खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनकी यह शैली भारतीय क्रिकेट में कोच और कप्तान के बीच पारंपरिक शक्ति संतुलन को बदलने की क्षमता रखती है।
गंभीर ने हाल ही में यह स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है और चयनकर्ता ही अंतिम निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी तब तक टीम में बने रहेंगे जब तक वे प्रदर्शन कर रहे हैं।
हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि गंभीर की सख्त कोचिंग शैली ने कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ मतभेद उत्पन्न किए हैं। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान होटल चयन और अभ्यास समय को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था।
भारतीय क्रिकेट में पहले भी कोच और कप्तान के बीच शक्ति संघर्ष देखे गए हैं। ग्रेग चैपल और अनिल कुंबले जैसे कोचों के कार्यकाल में भी इसी तरह के विवाद उत्पन्न हुए थे, क्योंकि उन्होंने वरिष्ठ खिलाड़ियों को पर्याप्त सम्मान और स्वतंत्रता नहीं दी थी।
गंभीर की कोचिंग शैली से यह प्रतीत होता है कि वह भारतीय क्रिकेट में कोच की भूमिका को और सशक्त बनाना चाहते हैं। यदि उनकी यह शैली सफल होती है, तो यह भारतीय क्रिकेट में कोच और कप्तान के बीच पारंपरिक शक्ति संतुलन को चुनौती दे सकती है।
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