भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की एक अदालत से एक और बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन में पिछले छह साल से जेल में बंद नीरव मोदी की जमानत अर्जी को लंदन हाई कोर्ट की किंग्स बेंच डिवीजन ने एक बार फिर खारिज कर दिया। यह उसकी अब तक की दसवीं जमानत याचिका थी, जिसे ब्रिटिश क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस और भारत से पहुंची सीबीआई की टीम की दलीलों के बाद खारिज कर दिया गया।
नीरव मोदी 2019 से लंदन की जेल में बंद है और उस पर भारत में पंजाब नेशनल बैंक के साथ करीब 6500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है, जिसे यूके की अदालत ने मंजूरी भी दे दी है।
इस ताज़ा सुनवाई में क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकीलों ने जोरदार तरीके से भारत की ओर से पक्ष रखा। सीबीआई की एक विशेषज्ञ टीम ने अदालत में मजबूत सबूत और तर्क पेश किए, जिसके चलते न्यायालय ने नीरव की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
जमानत के प्रयास बार-बार विफल
नीरव मोदी ने अब तक दस बार जमानत के लिए अदालत का रुख किया है, लेकिन हर बार उसे निराशा हाथ लगी है। उसके प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी लड़ाई लगभग समाप्त हो चुकी है, परंतु वह अब यूके में जारी एक “गोपनीय प्रक्रिया” के कारण अभी भारत नहीं भेजा जा सका है।
गोपनीय प्रक्रिया बनी रोड़ा
ब्रिटेन की एक अदालत ने इस साल 27 फरवरी को कहा था कि नीरव मोदी एक “गोपनीय प्रक्रिया” के तहत रिमांड पर है, जो 2026 के अंत तक जारी रह सकती है। न्यायमूर्ति डेविड बेली ने बताया था कि नीरव मोदी ने सभी आरोपों से इनकार किया है और अभी उसे दोषी नहीं ठहराया गया है। माना जा रहा है कि यह प्रक्रिया ब्रिटेन में शरण के आवेदन से संबंधित है, हालांकि अदालत में इस पर अब तक केवल परोक्ष रूप से चर्चा हुई है।
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