मॉस्को: रूस और उज्बेकिस्तान मिलकर एक ऐतिहासिक रेलवे परियोजना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जिसका नाम है ट्रांस-अफगान रेलवे कॉरिडोर। इस परियोजना का उद्देश्य अफगानिस्तान के ज़रिए मध्य एशिया को भारतीय उपमहाद्वीप से जोड़ना है। इस रेल मार्ग के लिए चल रहा फिजिबिलिटी सर्वे 2026 की शुरुआत तक पूरा होने की उम्मीद है।
परिवहन के नक्शे में बड़ा बदलाव
यह बहुपक्षीय परियोजना केवल एक नया रेलवे ट्रैक नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के परिवहन ढांचे और व्यापार मार्गों को नया स्वरूप देने का काम करेगी। अगर यह योजना सफल होती है, तो यूरोप, रूस, मध्य एशिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक स्थलीय संपर्क स्थापित हो सकेगा।
उज्बेकिस्तान से होगा शुरुआत
इस रेल मार्ग की शुरुआत उज्बेकिस्तान के टर्मेज शहर से होगी, जो पहले से ही उत्तरी अफगानिस्तान के खैरातन से जुड़ा हुआ है। यह वही पुराना रेल नेटवर्क है जिसे सोवियत काल में तैयार किया गया था। नई परियोजना इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अफगानिस्तान को पार करेगी और दक्षिण की ओर बढ़ते हुए भारतीय उपमहाद्वीप से संपर्क बनाएगी।
रूस और उज्बेकिस्तान की साझेदारी
रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने ‘काजान फोरम 2025’ के दौरान जानकारी दी कि दोनों देशों के रेलवे विशेषज्ञ मिलकर परियोजना का विस्तृत सर्वेक्षण कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2026 की शुरुआत में सर्वे का काम पूरा होते ही इसे लागू करने का निर्णय लिया जा सकेगा।
परियोजना का रणनीतिक महत्व
रूस के उप परिवहन मंत्री दमित्री जेवरेव के अनुसार, यह रेल मार्ग पूरे क्षेत्र के भौगोलिक और आर्थिक परिदृश्य को बदल देगा। काजान में आयोजित फोरम के दौरान उन्होंने बताया कि बहुपक्षीय सहयोग और अफगानिस्तान में हो रहे सर्वे के लिए कार्य समूह की भूमिका सराहनीय रही है।
भविष्य की योजनाएं और लागत
इस परियोजना की नींव अप्रैल 2024 में उज्बेक राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव की मॉस्को यात्रा के दौरान रखी गई थी, जब रूस और उज्बेकिस्तान के बीच एक प्रारंभिक समझौता हुआ। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस रेलवे कॉरिडोर के निर्माण में करीब पांच वर्ष लग सकते हैं और इसकी लागत लगभग 4.8 अरब अमेरिकी डॉलर हो सकती है।
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