इस्लामाबाद/नई दिल्ली: हाल ही में भारत द्वारा किए गए सटीक सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से नरमी के संकेत मिल रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहली बार सार्वजनिक मंच से भारत के साथ बातचीत की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को आपसी मुद्दों का हल बातचीत के माध्यम से निकालना चाहिए।
तीन युद्ध, लेकिन हल नहीं निकला – शरीफ
पाकिस्तानी सेना के सम्मान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शहबाज शरीफ ने कहा, “भारत और पाकिस्तान ने अतीत में कई युद्ध लड़े, लेकिन उनसे किसी को कोई लाभ नहीं हुआ। अब समय आ गया है कि हम एक मेज पर बैठें और कश्मीर समेत बाकी विवादों पर शांतिपूर्वक समाधान तलाशें।” उन्होंने यह भी कहा कि “बिना समझौते के इस क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।”
भारत की सख्त शर्तें
हालांकि भारत की ओर से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि बातचीत का कोई भी प्रस्ताव केवल आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर ही सीमित रहेगा। भारत सरकार ने अन्य किसी मुद्दे पर चर्चा से साफ इनकार कर दिया है।
ऑपरेशन सिंदूर का असर
गौरतलब है कि 7 मई को भारतीय सेना ने पीओके और पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इसमें करीब 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी ड्रोन हमले की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके बाद भारत ने एक के बाद एक मिसाइल हमले कर पाकिस्तान के कई सामरिक ठिकानों को तबाह कर दिया।
सीजफायर का प्रस्ताव
लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई के दबाव में पाकिस्तान ने भारत के सामने संघर्षविराम (सीजफायर) का प्रस्ताव रखा, जिसे भारत ने आतंकवाद और पीओके से संबंधित मुद्दों की सीमा में स्वीकार किया है। शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर क्षेत्र में शांति कायम होती है, तो पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का सहयोग भी कर सकता है।
नतीजा – दबाव में बदला रुख
भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक रुख के बाद पाकिस्तान की रणनीति में नरमी आई है। अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तान अपनी बातों को जमीन पर उतार पाएगा, या यह सिर्फ अस्थायी कूटनीतिक बयानबाज़ी है।
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