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जयपुर। राजस्थान में तेज गर्मी के चलते बिजली की मांग बहुत बढ़ गई है। शाम के समय (7 बजे से रात 12 बजे तक) बिजली की खपत सबसे ज्यादा हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट को फिर से चालू करने की तैयारी की जा रही है।
उत्पादन महंगा, फिर भी चलाना जरूरी
इस प्लांट से बिजली बनाने की लागत बहुत ज्यादा – 15 से 16 रुपए प्रति यूनिट आती है, क्योंकि इसमें गैस और स्टीम टरबाइन दोनों का इस्तेमाल होता है। गैस महंगी होने से खर्च ज्यादा होता है। यही कारण है कि अप्रैल में इसे सिर्फ 3 दिन ही चलाया गया था।
राजस्थान को एक्सचेंज से भी नहीं मिल रही पर्याप्त बिजली
फिलहाल राजस्थान को रोजाना बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच 700 से 1200 मेगावाट की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह कमी बिजली बाजार (पावर एक्सचेंज) से खरीदकर पूरी की जा रही है, जहां 10 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। लेकिन देश के बाकी राज्यों में भी बिजली की कमी है, जिससे राजस्थान को पूरी बिजली मिलना मुश्किल हो रहा है।
रामगढ़ प्लांट भी पूरी क्षमता से नहीं चल रहा
राजस्थान का दूसरा गैस पावर प्लांट रामगढ़ है, जिसकी कुल क्षमता 270.5 मेगावाट है। इसमें से सिर्फ 110.5 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है, क्योंकि बाकी यूनिट्स के लिए गैस उपलब्ध नहीं है।
भारी खर्च, फिर भी मिल रही कम बिजली
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पिछले चार सालों में इस प्लांट को सिर्फ डेढ़ महीने तक चलाया गया, जबकि सरकार करोड़ों रुपए फिक्स चार्ज के रूप में दे रही है।
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2023 में सितम्बर में 15 दिन, 2020 में करीब 1 महीना और इस साल अप्रैल में सिर्फ 3 दिन प्लांट चला।
प्लांट से बिजली कितनी महंगी मिलती है?
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सिर्फ गैस टरबाइन से उत्पादन: 16 रुपए प्रति यूनिट (आधे घंटे में शुरू किया जा सकता है)।
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गैस + स्टीम टरबाइन से उत्पादन: 12 रुपए प्रति यूनिट (कम से कम 12 घंटे में शुरू होता है)।
सरकार के सामने अब मुश्किल फैसला है – ज्यादा खर्च में बिजली बनाना या फिर बिजली कटौती का सामना करना!
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