दुनियाभर में कोरोना वायरस एक बार फिर चिंता की वजह बनता जा रहा है। भारत, अमेरिका और थाईलैंड जैसे देशों में नए मामलों में तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि अब हालात 2020 या 2021 जैसे नहीं हैं, फिर भी रिपोर्ट की गई मौतों और तेजी से फैल रहे वेरिएंट्स ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत में केस बढ़े, मौतें भी डरा रहीं
भारत में बीते एक हफ्ते में 1000 से ज्यादा कोविड-19 के नए केस सामने आए हैं। नोएडा जैसे शहरी इलाकों में संक्रमण के क्लस्टर बन रहे हैं — हाल ही में वहां 9 नए केस रिपोर्ट हुए हैं, जिससे एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
देशभर में 7 मौतों की पुष्टि हुई है, हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि मौतें सिर्फ कोविड से हुईं या पहले से मौजूद बीमारियों की भी भूमिका रही।
थाईलैंड में हालात चिंताजनक, एक हफ्ते में 50 हजार से ज्यादा केस
थाईलैंड में कोविड मामलों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। बीते सप्ताह 50,000 से अधिक नए संक्रमित मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, टेस्टिंग और रिपोर्टिंग में कमी के चलते असल संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
अमेरिका में हफ्तेभर में 350 मौतें, नया वेरिएंट बना चिंता का कारण
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, अमेरिका में हर हफ्ते औसतन 350 मौतें कोविड-19 के कारण हो रही हैं।
इनके पीछे एक नया सब-वेरिएंट NB.1.8.1 बताया जा रहा है, जो न केवल अमेरिका बल्कि सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों में भी तेजी से फैल रहा है। इस वेरिएंट की संक्रामकता अधिक मानी जा रही है, लेकिन गंभीरता को लेकर अभी अध्ययन जारी हैं।
कम टीकाकरण और गिरती इम्युनिटी बन रही हैं वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में लोगों का अपडेटेड वैक्सीन डोज़ न लेना भी मौतों का एक बड़ा कारण बन रहा है:
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केवल 23% वयस्कों ने ही नई बूस्टर डोज़ ली है
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बच्चों में यह आंकड़ा 13% से भी कम है
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बुजुर्गों और पूर्व-रोगग्रस्त व्यक्तियों में संक्रमण ज्यादा घातक साबित हो रहा है
CDC ने 65 वर्ष से अधिक आयु वालों को हर छह महीने में दो वैक्सीन डोज़ लेने की सलाह दी है।
इलाज में देरी से बढ़ रहा जोखिम
एक और बड़ा कारण है इलाज में लापरवाही।
हालांकि अमेरिका में मोलनुपिराविर (Merck) और पैक्सलोविड (Pfizer) जैसी एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अधिकतर लोग लक्षण दिखने के बाद भी समय पर दवा नहीं लेते।
विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण के शुरुआती 5 दिनों में दवा लेना बेहद जरूरी है, तभी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष: कोरोना गया नहीं, बस बदले हुए रूप में मौजूद है
हालात पहले से बेहतर जरूर हैं, लेकिन कोविड-19 पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नए वेरिएंट्स, कमजोर टीकाकरण कवरेज और लापरवाह व्यवहार मिलकर संक्रमण को दोबारा पनपने का मौका दे रहे हैं।
अभी भी मास्क, हाइजीन, समय पर वैक्सीन और जागरूकता ही बचाव का सबसे मजबूत तरीका है।
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