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दक्षिण अफ्रीका की बदलती सामाजिक तस्वीर: आधे से ज़्यादा घर सरकारी मदद पर निर्भर, बच्चों की पारिवारिक स्थिति में बड़ा बदलाव

जोहान्सबर्ग: दक्षिण अफ्रीका की नई जनगणना रिपोर्ट से देश की सामाजिक और पारिवारिक संरचना में हो रहे गहरे बदलाव सामने आए हैं। साल 2024 की जनरल हाउसहोल्ड सर्वे के अनुसार, देश की आधी से अधिक आबादी अब किसी न किसी रूप में सरकारी सहायता पर निर्भर है, और पारंपरिक परिवारों का ढांचा तेजी से बदल रहा है।


बढ़ती निर्भरता: सरकारी मदद से चल रहे हैं घर

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां 2003 में केवल 12.8% नागरिक सामाजिक सहायता (जैसे कि पेंशन, बेरोजगारी भत्ता या बाल सहायता अनुदान) पर निर्भर थे, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 40.1% तक पहुंच गया है
कोविड-19 महामारी के समय शुरू की गई सोशल रिलीफ ऑफ डिस्ट्रेस (SRD) ग्रांट ने इस ग्रोथ को और तेज कर दिया। अब हर दूसरा घर यानी लगभग 50.4% परिवार किसी न किसी सरकारी अनुदान से लाभान्वित हो रहा है।


परिवार की मुखिया महिलाएं: नया सामाजिक संतुलन

परंपरागत रूप से पुरुष प्रधान समाज माने जाने वाले दक्षिण अफ्रीका में अब महिलाएं बड़ी संख्या में घर की ज़िम्मेदारी संभाल रही हैं।
2024 में 42.4% घर महिला नेतृत्व में थे, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में ये आंकड़ा और भी ऊंचा है:

  • Eastern Cape: 48.8%

  • KwaZulu-Natal: 46.8%

  • Gauteng: सबसे कम 37.3%


बच्चों की स्थिति चिंताजनक: टूटते परिवार, बढ़ती अनाथता

रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि अब केवल 31.4% बच्चे ही अपने दोनों माता-पिता के साथ रहते हैं।

  • 45.5% बच्चे सिर्फ मां के साथ रह रहे हैं,

  • 18.8% बच्चे ऐसे हैं जो अपने किसी भी जैविक माता-पिता के साथ नहीं रहते,

  • और 11.7% बच्चे अनाथ हैं।

यह ट्रेंड पारिवारिक ढांचे में आए गंभीर बदलाव और सामाजिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है।


बुनियादी सुविधाओं में आई तेजी से सुधार

जहां एक तरफ सामाजिक असमानता की तस्वीर उभरती है, वहीं दूसरी ओर घर, बिजली, शौचालय और इंटरनेट जैसी सुविधाओं में जबरदस्त प्रगति दर्ज की गई है:

  • 84.1% लोग अब पक्के घरों में रह रहे हैं (2002 में यह आंकड़ा 73.5% था)।

  • 87.7% घरों तक अब नल का पानी पहुंचता है।

  • 90.2% घरों में बिजली, और

  • 83.1% घरों में बेहतर शौचालय उपलब्ध हैं।

  • खाना पकाने के लिए अब 77.3% घर बिजली का प्रयोग करते हैं।


डिजिटल युग की दस्तक: मोबाइल-इंटरनेट ने बदली तस्वीर

संचार और मनोरंजन के साधनों में लैंडलाइन और रेडियो का युग पीछे छूट चुका है:

  • अब सिर्फ 3.4% घरों में लैंडलाइन है, जबकि

  • 96.1% परिवारों के पास मोबाइल फोन हैं।

  • 82.1% घर अब इंटरनेट से जुड़े हैं (2010 में यह सिर्फ 28% था)।

  • रेडियो की पहुंच 2002 में 79.8% थी, जो अब घटकर 31.3% रह गई है।

  • 77.5% घरों में टीवी है और

  • 58.6% घर पेड टीवी सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।


निष्कर्ष: उभरते विकास के बीच गहराते सामाजिक संकट

जहां एक ओर दक्षिण अफ्रीका ने बुनियादी ढांचे और डिजिटल सुविधा में उल्लेखनीय प्रगति की है, वहीं पारिवारिक ढांचे का बिखराव और बढ़ती आर्थिक निर्भरता एक गहरी सामाजिक चिंता बनकर सामने आ रही है।
सरकार के लिए अब चुनौती यह है कि वह सांस्कृतिक संतुलन और सामाजिक सुरक्षा दोनों को एक साथ बनाए रखने की दिशा में मजबूत कदम उठाए।

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