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गाजा में इजरायल की नई सैन्य नीति? अब बदले हुए तरीकों से हो रहा है हमला

रफह (गाजा):
इजरायल और गाजा के बीच जारी संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है। हाल के दिनों में जिस प्रकार से सहायता वितरण स्थलों पर गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं, उससे संकेत मिल रहा है कि इजरायल की रणनीति में स्पष्ट बदलाव हुआ है। अब युद्ध केवल हमास के खिलाफ नहीं बल्कि उस ज़ोन में मौजूद नागरिकों की गतिविधियों पर भी सख्ती से केंद्रित हो गया है।


रफह में फिर चली गोली, 27 की मौत

गाजा के दक्षिणी हिस्से रफह में एक सहायता केंद्र की ओर बढ़ रहे नागरिकों पर की गई गोलीबारी में कम से कम 27 लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है। यह तीन दिनों में तीसरी घटना है जब सहायता वितरण से जुड़े इलाकों में गोलीबारी हुई है।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। ‘रेड क्रॉस’ की रिपोर्ट के अनुसार, उसके फील्ड अस्पताल में 184 घायल पहुंचे, जिनमें से कम से कम 27 लोगों की जान चली गई।


इजरायली सेना की सफाई

इजरायली सैन्य प्रवक्ता एफी डिफ्रिन ने कहा कि गोलीबारी का मकसद भीड़ में छिपे संदिग्धों को हटाना था। उन्होंने दावा किया कि सेना ने पहले चेतावनी दी थी, लेकिन जवाब न मिलने पर कार्रवाई की गई। साथ ही उन्होंने हमास पर यह आरोप लगाया कि वह हताहतों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

इजरायल का यह भी कहना है कि वह सहायता वितरण केंद्रों तक पहुंच को नहीं रोक रहा बल्कि वहां जाने वाले नागरिकों को सहयोग दे रहा है।


घटना की सटीक लोकेशन और विवाद

‘गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन’ के मुताबिक, गोलीबारी वितरण स्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर वीरान इलाके में हुई। लेकिन यह चिंता का विषय है कि ऐसी घटनाएं लगातार सहायता केंद्रों के आसपास ही हो रही हैं, जिससे राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।


संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इजरायल की इस नई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि इस तरीके से भूख और मानवीय संकट का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि इससे हालात और बदतर हो सकते हैं।


स्थानीय नागरिकों का दर्द

रफह में विस्थापितों में से एक, 50 वर्षीय यासर अबू लुब्डा, ने बताया कि वह मदद पाने के लिए कतार में खड़े थे तभी अचानक फायरिंग शुरू हो गई। उन्होंने कहा,

“हम खाना लेने निकले थे, लेकिन घर लौटे तो लाशें साथ थीं।”

अस्पताल के निदेशक डॉ. आतिफ अल-हूत ने बताया कि अधिकतर लोग सीने, पेट और सिर में गोली लगने से घायल हुए थे। अस्पताल के नर्सिंग प्रमुख ने पुष्टि की कि मृतकों में दो महिलाएं और तीन बच्चे भी शामिल थे।


क्या यह रणनीति बदलाव का संकेत है?

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सहायता केंद्रों के पास हो रही गोलीबारी और इजरायली सेना का ‘संभावित खतरे’ के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बनाना, एक नई सैन्य रणनीति की ओर इशारा करता है। यह पहले की अपेक्षा कहीं अधिक आक्रामक और नागरिकों की गतिविधियों पर केंद्रित नीति है।

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