अंकारा:
तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोआन इन दिनों किसी राजनीतिक विरोधी या सत्ता संकट को लेकर नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक संकट को लेकर बेहद चिंतित हैं। बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण देश में जंगलों में आग लगने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है — और यही वजह है कि एर्दोआन अब खुद नागरिकों को सतर्कता की चेतावनी देने पर मजबूर हो गए हैं।
🔥 गर्मी बढ़ी, जंगलों में आग का खतरा भी
सोमवार को अंकारा स्थित एतिमेसगुट एयरपोर्ट पर आयोजित “ग्रीन होमलैंड हीरोज ऑन ड्यूटी” कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रपति एर्दोआन ने आगाह किया कि देश के जंगल गंभीर जोखिम में हैं।
उन्होंने कहा,
“तापमान तेजी से बढ़ रहा है, नमी घट रही है और तेज हवाएं आग को uncontrollable बना सकती हैं। इन हालात में खेतों में या जंगलों के करीब आग जलाना सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि देश के साथ गद्दारी है।”
✈️ फायरफाइटिंग में तुर्किए का नया दम
इस मौके पर सरकार ने नई एरियल फायरफाइटिंग यूनिट्स को लॉन्च किया।
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2002 में तुर्किए के पास एक भी पानी गिराने वाला विमान नहीं था,
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अब उसके पास हैं:
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27 वाटर बमिंग एयरक्राफ्ट
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105 हेलिकॉप्टर
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14 निगरानी ड्रोन
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184 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त फायर वॉच टावर
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🌲 जंगल बढ़े लेकिन आग का खतरा भी दोगुना
राष्ट्रपति ने बताया कि 2024 तुर्किए के इतिहास का सबसे गर्म साल रहा है।
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पिछले दशक में जंगलों में आग से तबाह हुए इलाकों का क्षेत्रफल दोगुना हो चुका है।
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2002 में जहां देश के पास 20.8 मिलियन हेक्टेयर जंगल था,
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अब यह बढ़कर 23.4 मिलियन हेक्टेयर हो गया है।
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“भविष्य के लिए सांस” नाम की मुहिम के तहत 7.5 अरब पौधे लगाए गए हैं।
🧺 गांवों को जंगलों से जोड़ने की रणनीति
सरकार सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं कर रही, बल्कि जंगलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ने की भी पहल की जा रही है।
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2025 तक 12,000 जंगल गांवों के परिवारों को 2.6 अरब लीरा की सहायता दी जाएगी।
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अखरोट, बादाम और लैवेंडर जैसे फलों और औषधीय पौधों की खेती से ग्रामीणों की आय बढ़ाने की योजना है।
❌ फर्जी खबरों पर नाराज़ एर्दोआन
राष्ट्रपति ने जंगलों में आग लगने की घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही फेक तस्वीरों और भ्रामक आरोपों पर नाराज़गी जताई।
उन्होंने कहा,
“जो लोग अफवाहें फैलाते हैं, वो उन फायरफाइटर्स का अपमान कर रहे हैं जो अपनी जान हथेली पर रखकर आग से लड़ते हैं।”
✅ निष्कर्ष
एक ओर जहां एर्दोआन वैश्विक मंचों पर तुर्किए की राजनीति और विदेश नीति को लेकर सक्रिय हैं, वहीं जलवायु संकट ने उन्हें घरेलू स्तर पर एक नई चुनौती दे दी है। इस बार लड़ाई सत्ता की नहीं, पर्यावरण बचाने की है — और राष्ट्रपति इसमें कोई कोताही नहीं बरतना चाहते।
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