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ईरान में तख्तापलट की योजना नहीं: इजराइली विदेश मंत्री गिदोन सार का बड़ा बयान

ईरान और इजराइल के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच इजराइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने स्पष्ट किया है कि इजराइल की मंशा ईरानी शासन को गिराने की नहीं है। उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाईयों का उद्देश्य केवल खतरे को रोकना है, न कि सत्ता परिवर्तन को अंजाम देना।

“ईरानी जनता हमारा दुश्मन नहीं”: सार

सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में गिदोन सार ने उन अटकलों को खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि इजराइल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा, “हमने कभी भी खामेनेई को टारगेट करने का फैसला नहीं लिया। यह ईरान की जनता को तय करना है कि उन्हें कैसा नेतृत्व चाहिए। हम ईरानी लोगों को अपना दुश्मन नहीं मानते।”

1979 के बाद बिगड़े रिश्ते

गिदोन सार ने कहा कि 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान और इजराइल के बीच अच्छे संबंध हुआ करते थे। लेकिन उसके बाद जब कट्टरपंथी सत्ता में आए, तो संबंधों में गहरी दरार आ गई। उन्होंने कहा, “तब से ही ईरान के नेता ‘अमेरिका को मौत’ और ‘इजराइल को मौत’ जैसे नारे लगाते हैं।”


खामेनेई को मारने की कथित योजना पर क्या कहा गया?

बीते कुछ दिनों में ऐसी खबरें आईं थीं कि इजराइल ने खामेनेई को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस योजना को अंतिम समय में वीटो कर दिया था।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया कि जब तक ईरान अमेरिकी नागरिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता, तब तक अमेरिका ईरानी नेतृत्व पर हमले की अनुमति नहीं देगा। हालांकि, इजराइल के स्थानीय मीडिया चैनल-12 ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके लिए कोई भी राजनीतिक नेता “अछूता” नहीं है, लेकिन ट्रंप के वीटो की पुष्टि नहीं की गई है।


इजराइल के हालिया हमले और संदेश

पिछले कुछ दिनों में इजराइल ने ईरान के करीब 30 सैन्य अधिकारियों को अपने हमलों में निशाना बनाया है। ये हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रत्यक्ष आक्रामक गतिविधियों के जवाब में किए गए थे। हालांकि इजराइल ने बार-बार दोहराया है कि उसका उद्देश्य “सुरक्षा को बनाए रखना” है, ना कि सत्ता परिवर्तन करना।


निष्कर्ष: तनाव के बीच संयम का संदेश

इजराइली विदेश मंत्री का यह बयान उस समय आया है जब क्षेत्रीय हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। सत्ता परिवर्तन की मंशा से इनकार कर इजराइल ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि उसका संघर्ष ईरानी नेतृत्व की नीतियों से है, न कि वहां की जनता से।

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