वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के बीच व्हाइट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। दोनों नेताओं ने लंच मीटिंग के दौरान खासतौर पर ईरान-इज़रायल तनाव, दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति, और भारत-पाकिस्तान के हालिया संघर्ष पर चर्चा की।
🏛️ ट्रंप का पाकिस्तान पर बयान: “एक अहम क्षेत्रीय भागीदार”
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने पाकिस्तान को “एक प्रभावशाली क्षेत्रीय खिलाड़ी” करार दिया। उन्होंने कहा:
“पाकिस्तान की ईरान को लेकर जो समझ है, वह हमारे लिए मूल्यवान है। इस क्षेत्र में स्थिरता लाने की कूटनीतिक कोशिशों में पाकिस्तान की भूमिका अहम हो सकती है।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका वेस्ट एशिया में संभावित हस्तक्षेप को लेकर रणनीतिक समीकरण साध रहा है।
✈️ G7 समिट बीच में छोड़कर लौटे ट्रंप
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने कनाडा के कनानसकीस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन को बीच में छोड़कर मंगलवार सुबह ही वाशिंगटन वापसी की, ताकि वह वेस्ट एशिया के हालात को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से तत्काल बैठक कर सकें। इसी दौरान असीम मुनीर के साथ यह उच्चस्तरीय मुलाकात भी तय हुई।
📞 मोदी-ट्रंप बातचीत का ज़िक्र
इस बैठक से कुछ समय पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बात हुई थी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जानकारी दी कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया था कि वह अमेरिका आते समय वाशिंगटन रुकें, लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के चलते पीएम मोदी ने असमर्थता जताई।
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष का समाधान सीधे सैन्य वार्ता से हुआ था, न कि किसी बाहरी मध्यस्थता से।
🇮🇳 भारत ने एक बार फिर मध्यस्थता को नकारा
मोदी ने ट्रंप को यह भी स्पष्ट रूप से बताया कि भारत मध्यस्थता की अवधारणा को न पहले स्वीकार करता था, न अब करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी समझौते के कार्रवाई करता रहेगा और क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा।
📌 असीम मुनीर को मिला विशेष निमंत्रण
यह बैठक इसलिए भी उल्लेखनीय मानी जा रही है क्योंकि सेवारत पाकिस्तानी सेना प्रमुख को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सीधे आमंत्रित किया जाना एक दुर्लभ अवसर है। अतीत में यह सम्मान अयूब खान, जनरल ज़िया-उल-हक, और परवेज़ मुशर्रफ को मिला था—लेकिन वे राष्ट्राध्यक्ष के पद पर भी थे। मुनीर के लिए यह स्वागत एक रणनीतिक संकेत माना जा रहा है।
✅ निष्कर्ष:
व्हाइट हाउस में हुई यह बैठक सिर्फ अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की दिशा तय नहीं करती, बल्कि दक्षिण एशिया की भविष्य की राजनीतिक और कूटनीतिक रणनीति में भी इसकी गूंज सुनाई दे सकती है। ट्रंप के बयानों से साफ है कि अमेरिका अब पाकिस्तान को सिर्फ एक सैन्य साझेदार नहीं, बल्कि संभावित “शांति मध्यस्थ” के रूप में देख रहा है—हालाँकि भारत का रुख इस विषय पर बिल्कुल अलग है।
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