जागरेब (क्रोएशिया): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर दुनिया को शांति और संवाद का संदेश दिया है। क्रोएशिया की राजधानी जागरेब में अपने समकक्ष प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविक के साथ संयुक्त बैठक के बाद उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं, केवल कूटनीति और बातचीत से ही संभव है।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में ईरान और इज़रायल के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है और कई देश युद्ध के खतरों से चिंतित हैं।
क्रोएशिया में हुई महत्वपूर्ण बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी साइप्रस और कनाडा की यात्रा के बाद क्रोएशिया पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए रक्षा, फार्मा, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों पर चर्चा की।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा:
“प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविक के साथ जागरेब में हुई हमारी वार्ता बेहद रचनात्मक रही। हमने रक्षा, ऊर्जा, फार्मा, आईटी, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। सेमीकंडक्टर और शिपबिल्डिंग में साझेदारी की संभावनाएं भी उजागर हुईं।”
आतंकवाद पर साझा रुख
दोनों नेताओं ने आतंकवाद को मानवता का साझा दुश्मन बताया। पीएम मोदी ने कहा:
“चाहे वह एशिया हो या यूरोप, कोई भी समाज आतंकवाद के खतरे से अछूता नहीं है। लोकतांत्रिक ताकतों को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।”
प्रधानमंत्री प्लेंकोविक ने भी भारत के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि “हम आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े हैं और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा व संप्रभुता का पूरा समर्थन करते हैं।”
भारत-यूरोपीय संबंधों को गहराई देने की पहल
बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत-क्रोएशिया संबंध सिर्फ द्विपक्षीय नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति में भी योगदान देने वाले हैं।
युद्ध नहीं, सहयोग और संवाद चाहिए: पीएम मोदी
ईरान-इज़रायल संघर्ष के संदर्भ में पीएम मोदी का यह बयान कि “यह युद्ध का समय नहीं है”, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया:
“किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। हम एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहाँ मतभेद युद्ध नहीं, संवाद से सुलझाए जाएं।”
ऐतिहासिक यात्रा
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नरेंद्र मोदी क्रोएशिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। यह भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से आगे बढ़कर ‘यूरोपीय संतुलन’ कूटनीति का संकेत देता है।
✅ निष्कर्ष:
क्रोएशिया से पीएम मोदी का यह शांति और सहयोग का संदेश, सिर्फ भारत की विदेश नीति की स्थिरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारत वैश्विक संघर्षों में एक जिम्मेदार और शांतिपूर्ण समाधान खोजने वाली शक्ति के रूप में खड़ा है।
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