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पंडित प्रदीप मिश्रा विवाद:
अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले कुबेरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा को एक बार फिर माफी मांगनी पड़ी है। इस बार विवाद भगवान चित्रगुप्त को लेकर दिए गए उनके बयान पर हुआ, जिससे कायस्थ समाज नाराज़ हो गया।
क्या कहा था पंडित मिश्रा ने?
शिवमहापुराण की कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने यमराज, चित्रगुप्त और भगवान शिव से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया था। इस पर कुछ लोगों को ऐसा लगा कि उन्होंने कायस्थ समाज या चित्रगुप्त जी का अपमान किया है।
मिश्रा जी ने क्या दी सफाई?
उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी समाज या व्यक्ति को ठेस पहुंचाने का नहीं था। यह शिवमहापुराण का प्रसंग था और अगर किसी को मेरी वाणी से दुख पहुंचा हो तो मैं क्षमा मांगता हूं। शिवमहापुराण हमेशा सभी के कल्याण की बात करता है, न कि किसी को अपमानित करने की।
बार-बार माफी क्यों मांगनी पड़ती है?
जब पंडित मिश्रा से पूछा गया कि उन्हें बार-बार माफी क्यों मांगनी पड़ रही है (जैसे राधा रानी और होली से जुड़े बयान पर), तो उन्होंने कहा कि वे जो कुछ भी कहते हैं, वह शास्त्रों और पुराणों पर आधारित होता है। कई बार लोगों ने वह बातें खुद नहीं पढ़ी होतीं, इसलिए उन्हें गलतफहमी हो जाती है।
सब समाजों का सम्मान करते हैं
मिश्रा जी ने कहा कि व्यासपीठ कभी किसी समाज का अपमान नहीं करती। हम सभी वर्णों को अपना मानते हैं – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सभी हमारे अपने हैं। फिर भी अगर हमारी किसी बात से किसी को ठेस पहुंची है, तो हम दिल से क्षमा मांगते हैं।
निष्कर्ष:
पंडित प्रदीप मिश्रा ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी समाज को ठेस पहुंचाना नहीं है। अगर किसी को उनकी बातों से दुख हुआ है तो वे क्षमाप्रार्थी हैं और सभी समाजों का सम्मान करते हैं।
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