20 जून 2025 | रक्षा विश्लेषण
ईरान और इसराइल के बीच तेज़ होती सैन्य झड़पों के बीच एक नाम सुर्खियों में है — सेजिल मिसाइल। यह ईरान की स्वदेशी दो-चरणीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे पहली बार हाल के हमलों में उपयोग किए जाने का दावा किया गया है।
ईरान के अनुसार, बुधवार रात “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3” के तहत यह मिसाइल लॉन्च की गई। वहीं इसराइल का कहना है कि उसकी रक्षा प्रणाली ने इसे इंटरसेप्ट कर लिया।
सेजिल मिसाइल: तकनीकी ताक़त का परिचय
ईरान द्वारा विकसित की गई यह मिसाइल मध्यम दूरी की रणनीतिक बैलिस्टिक प्रणाली है, जो युद्ध में इसकी स्थिति को काफी हद तक बदल सकती है।
मुख्य विशेषताएं:
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🔹 रेंज: लगभग 2000 किमी, जिससे यह इसराइल, खाड़ी देश, दक्षिण-पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया तक मार करने में सक्षम है।
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🔹 पेलोड क्षमता: लगभग 700 किलोग्राम, जो इसे भारी वॉरहेड ले जाने योग्य बनाता है।
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🔹 लॉन्च वज़न: अनुमानतः 23,600 किलोग्राम।
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🔹 ईंधन: ठोस ईंधन आधारित — जिससे इसे तेजी से लॉन्च किया जा सकता है और इसमें रखरखाव आसान होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसे ईरान के नतांज़ शहर से लॉन्च किया जाए, तो यह मिसाइल मात्र 7 मिनट में तेल अवीव तक पहुंच सकती है।
सेजिल का विकास और परीक्षण इतिहास
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📌 पहला परीक्षण 2008 में हुआ था, जब इसने 800 किमी दूरी तय की थी।
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📌 2009 में अपग्रेडेड संस्करण सेजिल-2 का परीक्षण हुआ।
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📌 रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक तीसरे संस्करण सेजिल-3 की योजना भी रही है, जिसकी 4000 किमी रेंज और 38,000 किग्रा वज़न की बात की जाती रही है — हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई।
2012 के बाद लंबे समय तक सेजिल का सार्वजनिक परीक्षण नहीं हुआ, लेकिन 2021 में इसे एक सैन्य अभ्यास में फिर से प्रदर्शित किया गया।
सेजिल का युद्ध में इस्तेमाल: पहली बार पुष्टि
हालिया संघर्ष में ईरान ने पहली बार आधिकारिक तौर पर इस मिसाइल के उपयोग का दावा किया है, जिसने इसे एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों और विश्लेषकों के फोकस में ला दिया है।
ईरानी दूतावास ने इसे “सबसे सटीक और प्रभावशाली रणनीतिक हथियार” करार दिया है।
इसराइल-ईरान संघर्ष की मौजूदा स्थिति
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13 जून को इसराइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला शुरू किया। इसे ‘ऑपरेशन राइज़िंग लायन’ नाम दिया गया।
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जवाब में ईरान ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, जिसमें सेजिल मिसाइल का भी इस्तेमाल हुआ।
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एक मिसाइल बेर्शेबा के सोरोका अस्पताल के पास गिरी, जिससे भारी नुकसान और दर्जनों नागरिक घायल हुए।
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जवाबी हमलों में इसराइल ने अराक और नतांज़ के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया।
सेजिल को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं क्यों?
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इसकी रेंज और गति इसे दुश्मन की डिटेक्शन प्रणाली को मात देने में सक्षम बनाती है।
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यह मिसाइल रणनीतिक रूप से उन ठिकानों को निशाना बना सकती है जहां से जवाबी कार्रवाई की संभावना कम होती है।
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सॉलिड फ्यूल तकनीक इसे कम समय में लॉन्च करने योग्य बनाती है — जिससे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है।
निष्कर्ष: सेजिल क्यों बनी भू-राजनीतिक चर्चा का केंद्र
ईरान की सेजिल मिसाइल न केवल उसकी सैन्य स्वायत्तता का प्रतीक है, बल्कि इसराइल और अमेरिका के लिए एक रणनीतिक चुनौती भी बन गई है। इसके इस्तेमाल की पुष्टि ने पश्चिमी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है।
अब सवाल यह है कि:
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क्या यह मिसाइल भविष्य में स्थायी हथियार तैनाती का हिस्सा बनेगी?
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और क्या इससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय वार्ता में ताकतवर स्थिति मिल सकती है?
इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में सामने आएंगे।
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