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उदयपुर। राजस्थान में देवस्थान विभाग के अधीन कुछ मंदिर ऐसे हैं, जो ‘खान मालिक’ की भूमिका में हैं। इन मंदिरों की जमीनों पर खनन पट्टे दिए गए हैं, जिनसे हर साल 70 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई होती है।
भगवान के नाम पर खदानें
राजस्थान देवस्थान विभाग एक ऐसा विभाग है, जिसका कार्यक्षेत्र राज्य से बाहर तक फैला हुआ है। इस विभाग के पास 2327 संपत्तियां हैं, जिनमें से कुछ जमीनों पर खनन के पट्टे भी दिए गए हैं।
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झालरापाटन के द्वारिकाधीश मंदिर की जमीन पर 6 खनन पट्टे चल रहे हैं, जिनसे करीब 5 लाख की सालाना आमदनी होती है।
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उदयपुर के ठाकुर श्यामसुंदरजी मंदिर की जमीन पर 24 पट्टे हैं, जिनसे 25 लाख रुपए मिलते हैं।
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ऋषभदेव मंदिर, उदयपुर की जमीन पर 25 खनन पट्टे हैं, जिनसे 40 लाख रुपए की कमाई होती है।
लीजधारकों पर बकाया और गड़बड़ियां
कुछ पट्टाधारकों ने खनन करने के बाद लीज की राशि जमा नहीं करवाई है।
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कुछ ने खदानें आगे किराए पर (सबलेट) दे दीं।
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कुछ मामलों में ज्यादा जमीन पर खनन किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
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विभाग ने नोटिस जारी किए हैं, लेकिन कई मामलों में कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
खनन के लिए मिलती है एनओसी
देवस्थान विभाग की ओर से खनन एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी किया जाता है, जिसके आधार पर खान विभाग लीज देता है।
निर्धारित शुल्क भी मंदिर की आमदनी के रूप में जमा होता है।
वासुदेव मालावत, आयुक्त, देवस्थान विभाग ने बताया कि सभी नियमों के तहत कार्यवाही की जा रही है और बकाया वसूली के प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष:
राजस्थान में कुछ मंदिर पूजा के स्थान के साथ-साथ आय के स्रोत भी हैं। इनकी जमीनों पर खनन से अच्छी-खासी आमदनी होती है, लेकिन साथ ही अनियमितताएं और बकाया भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
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