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“झुकने का सवाल ही नहीं”: ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की अमेरिका को चेतावनी

नई दिल्ली:
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्षविराम के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए दो टूक कहा कि ईरान कभी भी अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा और यदि भविष्य में कोई आक्रामकता हुई, तो उसकी कीमत अमेरिका को चुकानी पड़ेगी।

“समर्पण कभी नहीं होगा”

टेलीविजन पर प्रसारित एक भाषण में खामेनेई ने कहा:

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को आत्मसमर्पण करना चाहिए। आत्मसमर्पण! अब यह सिर्फ परमाणु कार्यक्रम या संवर्धन का मामला नहीं है, बल्कि ईरान को झुकाने की बात है। ऐसा कभी नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की हालिया मिसाइल जवाबी कार्रवाई—जिसमें कतर स्थित अमेरिकी अल-उदीद एयरबेस को निशाना बनाया गया—यह दर्शाता है कि ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक पहुंच रखने में सक्षम है।

“हमने अमेरिका को तमाचा मारा है”

हमारे दुश्मन मिसाइलों या परमाणु कार्यक्रम का बहाना बनाते हैं, लेकिन उनका असली मकसद ईरान को मजबूर करके झुकाना है। ट्रंप ने सच्चाई उजागर की कि अमेरिका तभी शांत होगा जब ईरान पूरी तरह समर्पण कर दे। परंतु हमारी क़ौम मज़बूत है, और ऐसा कभी नहीं होगा।

खामेनेई ने दावा किया कि ईरान की ताक़तवर प्रतिक्रिया ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह दोबारा किसी गलतफहमी में न रहे।


इज़राइल पर निशाना

खामेनेई ने कहा कि अमेरिका की युद्ध में दखल देने की मुख्य वजह यह थी कि यदि वह नहीं कूदता, तो इज़राइल पूरी तरह तबाह हो जाता।

ज़ायोनिस्ट शासन लगभग ढह चुका था। इस्लामी गणराज्य की जवाबी कार्रवाई ने उसे बुरी तरह कुचल दिया था।


‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ और संघर्षविराम की राह

इससे पहले अमेरिका ने अचानक युद्ध में कूदते हुए ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर B-2 बॉम्बर्स से हमला किया, जिसे ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ नाम दिया गया। यह कार्रवाई तब हुई जब खामेनेई सुरक्षा कारणों से भूमिगत बंकर में थे।

ईरान ने जवाब में अमेरिकी बेस पर हमला किया, लेकिन चेतावनी देकर यह सुनिश्चित किया कि अमेरिका को जान-माल का नुकसान न हो। इस पर अमेरिका ने पलटवार नहीं किया, जिससे युद्ध टल गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ घंटों बाद घोषणा की कि तेहरान और तेल अवीव संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं।


निष्कर्ष

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब केवल वार्ताओं की भाषा नहीं, बल्कि ताक़त से जवाब देगा। खामेनेई का बयान इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया में हालात फिलहाल स्थिर भले हों, लेकिन तनाव की चिंगारी अब भी ज़िंदा है।

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