वॉशिंगटन: अमेरिका के डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की हालिया रिपोर्ट से संकेत मिला है कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बावजूद उसका कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ, बल्कि कुछ महीनों के लिए पीछे गया है। यह आकलन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा दिए गए बयानों से विरोधाभासी है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान की परमाणु क्षमताएं पूरी तरह “नष्ट” हो गई हैं।
तीन मुख्य ठिकानों पर हमले, लेकिन पूरी तबाही नहीं
रविवार को अमेरिकी बमवर्षकों और मिसाइलों द्वारा Fordo, Natanz और Isfahan में स्थित तीन महत्वपूर्ण परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इन साइट्स पर बड़ी क्षति हुई, परन्तु कोर इन्फ्रास्ट्रक्चर अभी भी कुछ हद तक बरकरार है।
विशेष रूप से, Fordo केंद्र, जो भूमिगत है, उसकी बाहरी सुरंगें ध्वस्त हुई हैं, लेकिन अंदरूनी संवेदनशील उपकरण और संरचना को पूर्ण नुकसान नहीं हुआ।
व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट को खारिज किया
DIA की रिपोर्ट को व्हाइट हाउस ने “पूरी तरह गलत” बताया। नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गैबर्ड ने दावा किया कि अमेरिका की ताजा खुफिया जानकारी ट्रंप के दावे का समर्थन करती है कि ईरान की सुविधाएं पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं और उन्हें फिर से बनाने में वर्षों लग सकते हैं।
हालांकि, DIA ने कहा कि यह एक प्रारंभिक आकलन है और “कम आत्मविश्वास” के साथ तैयार किया गया है, क्योंकि अब तक विश्लेषकों को प्रत्यक्ष रूप से साइट्स का निरीक्षण करने का अवसर नहीं मिला है।
ईरान ने सामग्री पहले ही हटा ली थी?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ईरान ने हमलों से पहले ही कुछ संवेदनशील सामग्रियां जैसे कि उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम और कुछ सेंट्रीफ्यूज को स्थानांतरित कर दिया था। इसका मतलब है कि ईरान के पास फिर से कार्यक्रम शुरू करने की बुनियादी क्षमता अब भी मौजूद है।
Maxar Technologies द्वारा जारी उपग्रह चित्रों में Fordo साइट पर हमले से कुछ दिन पहले ट्रक और बुलडोज़र देखे गए थे, जिससे यह अटकलें लगीं कि ईरान ने कुछ सामग्री पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दी थी।
राजनीतिक बयानबाज़ी और विशेषज्ञों की चेतावनी
ट्रंप ने कहा, “यह एक पूर्ण तबाही थी। मीडिया जो कह रहा है वो बकवास है।” वहीं, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लीक हुए आकलन पर नाराज़गी जताई और इसे “गंभीर लापरवाही” कहा।
इज़राइली परमाणु ऊर्जा आयोग ने कहा कि इन हमलों ने ईरान की क्षमता को “कई वर्षों” पीछे धकेल दिया है, लेकिन उन्होंने कोई प्रमाण नहीं दिया।
हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने अपने सेंट्रीफ्यूज और 60% यूरेनियम को पहले ही हटा लिया, तो वह गुप्त रूप से किसी और स्थान पर फिर से संवर्धन शुरू कर सकता है। यदि यह यूरेनियम 90% तक संवर्धित हो जाए, तो यह परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त होगा।
क्या ईरान फिर से एक छुपा कार्यक्रम शुरू कर सकता है?
पूर्व खुफिया विश्लेषक एरिक ब्रेवर के अनुसार, “ईरान के पास अभी भी पर्याप्त सामग्री और तकनीकी क्षमता है कि वह एक छोटे पैमाने पर छिपे हुए कार्यक्रम को शुरू कर सके।”
लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ईरान ऐसा करता है, तो उसे महत्वपूर्ण उपकरण, वैज्ञानिक और निर्माण ढांचा फिर से खड़ा करना पड़ेगा, जो आसान नहीं है।
निष्कर्ष
हालांकि अमेरिकी और इज़राइली हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आघात पहुंचाया है, यह कहना कि पूरा कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त हो गया है, खुफिया आंकड़ों के मुताबिक अतिशयोक्ति है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास फिर से परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की जमीनी संरचना अब भी मौजूद है, और अमेरिका को इसके प्रति सतर्क रहना होगा।
CHANNEL009 Connects India
