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भरतपुर: अतिक्रमण हटाने पहुंचीं 3 जेसीबी, लोगों का विरोध, कई परिवारों की आंखों में आंसू

भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से बीनारायण गेट तक सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना के तहत बुधवार सुबह नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई बीनारायण गेट के पास कच्चा कुंडा इलाके में की जा रही है। कार्रवाई की खबर मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवारों की आंखों में आंसू आ गए।

सुबह 8 बजे शुरू हुई कार्रवाई

नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार विश्नोई ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण को लेकर पहले ही लोगों को नोटिस दिए जा चुके थे और उन्हें समय भी दिया गया था। बुधवार सुबह करीब 8 बजे तीन जेसीबी मशीनों के साथ कार्रवाई शुरू हुई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के 40 जवान भी मौके पर तैनात किए गए।

पहले चरण का काम हो चुका है

नगर निगम इससे पहले विश्वप्रिय शास्त्री पार्क से सलूजा हॉस्पिटल तक सड़क निर्माण और डिवाइडर का काम कर चुका है। पहले चरण में सलूजा हॉस्पिटल से पटाखा फैक्ट्री तक अतिक्रमण हटाया गया था। अब दूसरे चरण में पटाखा फैक्ट्री से बीनारायण गेट तक का इलाका खाली कराया जा रहा है।

विरोध हुआ, समझाइश के बाद शांत हुए लोग

कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने विरोध किया। प्रशासन की ओर से समझाइश की गई, जिसके बाद स्थिति को शांत कराया गया। नगर निगम ने जिला कलेक्टर से मौके पर मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का भी आग्रह किया था। अब तक 26 परिवारों को फ्लैट आवंटित किए जा चुके हैं। मंगलवार को कई परिवारों का सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली से दूसरी जगह शिफ्ट भी कराया गया।

गरीब परिवारों पर टूटा दुख

कच्चा कुंडा इलाके में रहने वाले ज्यादातर लोग मजदूरी या छोटी दुकानों से अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके लिए यह कार्रवाई किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। घर टूटने की आशंका से लोग अपने भविष्य को लेकर डरे हुए हैं।

“दुकान टूटी तो घर कैसे चलेगा?”

कच्चा कुंडा की रहने वाली पुष्पा ने बताया कि उनके पति की दस साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। वे अपनी तीन बेटियों के साथ रहती हैं और मोहल्ले में नमकीन-बिस्कुट बेचकर गुजारा करती हैं। उनका कहना है कि अगर दुकान टूट गई तो रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं बचेगा। बड़ी बेटी की शादी की उम्र हो चुकी है और उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है।

“दस फीट जगह में पांच परिवार कैसे रहेंगे?”

स्थानीय निवासी कौशल ने बताया कि उनके और उनके बाबा के मकानों का पट्टा है और दोनों मकानों में कुल पांच परिवार रहते हैं। नोटिस मिलने के बाद मकान टूटने पर पीछे सिर्फ दस फीट जगह बचेगी। इतनी कम जगह में सभी परिवारों का रहना मुश्किल होगा। उन्होंने मुआवजे या दूसरी जगह देने की मांग की है, लेकिन अभी सिर्फ आश्वासन ही मिला है।

“एक कमरे में पूरी जिंदगी कैसे गुजरेगी?”

रतन सिंह और पुरुषोत्तम ने बताया कि उनके परिवार में दो शादीशुदा बच्चे और वे पति-पत्नी रहते हैं। मकान टूटने के बाद सभी को एक ही कमरे में रहना पड़ेगा। मजदूरी से गुजारा करने वाले इन परिवारों के लिए यह स्थिति बहुत डराने वाली है।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर विकास और गरीबों के पुनर्वास से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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