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राजस्थान में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर चल रही बहस अब तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह आंदोलन राजस्थान के भविष्य के लिए अच्छा संकेत है।
क्यों आया गहलोत का बयान
गहलोत का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और जालौर जिलों में सोलर प्लांट के नाम पर बड़ी संख्या में खेजड़ी के पेड़ काटे जाने के आरोप लग रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी गरमा गई है।
“ये शुभ संकेत हैं”
अशोक गहलोत ने कहा कि पहले अरावली और अब खेजड़ी को बचाने के लिए जिस तरह आम लोग, संत समाज और बिश्नोई समाज आगे आ रहा है, वह राजस्थान के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर आज हम प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।
अमृता देवी और बलिदान की याद
गहलोत ने बिश्नोई समाज की अमृता देवी और 363 लोगों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि पेड़ों की रक्षा के लिए जान देना राजस्थान के इतिहास का गौरव है। उन्होंने कहा कि उसी भावना को आज फिर से अपनाने की जरूरत है।
सोलर प्लांट पर सवाल
गहलोत ने माना कि सौर ऊर्जा जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इससे मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है और लोगों को भीषण गर्मी व लू का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को इस पर साफ नीति बनानी चाहिए।
मुख्यमंत्री से की अपील
पूर्व मुख्यमंत्री ने भजनलाल सरकार से कहा कि जिस ट्री प्रोटेक्शन एक्ट का वादा किया गया है, उसे जल्द लागू किया जाए। साथ ही_attach उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री खुद आंदोलनकारियों से बात करें और इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें।
जन-जागरूकता जरूरी
गहलोत ने कहा कि सिर्फ बीकानेर में आंदोलन करने से बात नहीं बनेगी। हर नागरिक को अपने क्षेत्र में चर्चा और संवाद के जरिए पर्यावरण को बचाने की सोच विकसित करनी होगी।
कुल मिलाकर, गहलोत ने खेजड़ी बचाओ आंदोलन को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।
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